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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-४०२ १-८ ३४-३५ ३६-३७ १. ८ ३८-३९ हास्य-रति स्वपरोदयबन्धी । सान्तर-निरन्तरबन्धी अरति-शोक स्वपरोदयबन्धी सान्तरबन्धी भय-जुगुप्सा स्वपरोदयबन्धी निरन्तरबन्धी नपुंसकवेद स्वपरोदयबन्धी सान्तरबन्धी स्त्रीवेद स्वपरोदयबन्धी सान्तरबन्धी पुरुषवेद स्वपरोदयबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी नरकायु परोदयबन्धी निरन्तरबन्धी | तिर्यञ्चाय........! स्वपरोदयबन्धी ... निरन्तरबन्धी मनुष्यायु स्वपरोदयबन्धी । निरन्तरबन्धी देवायु परोदयबन्धी निरन्तरबन्धी परोदयबन्धी सान्तरबन्धी तिर्यञ्चगति- स्वपरोदयबन्धी सान्तर- निरन्तरबन्धी तिर्यञ्चगत्यानुपूर्वी १,२,४ १,२,४-७ नरकगति १-४ | ४७ १-५ ४८-४९ आनुपूर्वी स्वपरोदयबन्धी | सान्तर-निरन्तरबन्धी । १-४ | मनुष्यगति मनुष्यगत्यानुपूर्वी १-१४ ५०-५१ आनुपूर्वी १,२,४ १-४ | ५२ सान्तर-निरन्तरबन्धी सान्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी १ ५३-५६ १-१३ ५८ देवगति परोदयबन्धी एकेन्द्रियादि ४ जाति | स्वपरोदयबन्धी पञ्चेन्द्रियजाति । स्वपरोदयसम्बन्धी औदारिकशरीर व | स्वपरोदयसम्बन्धी औदारिक अंगोपांग वैक्रियिकशरीर परोदयबन्धी आहारकशरीर । परोदयबन्धी तैजसशरीर स्वोदयबन्धी कार्मणशरीर स्वोदयबन्धी वैक्रियिक अंगोपांग | परोदयबन्धी १-८ सान्तरनिरन्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी निरन्तरबन्धी निरन्तरबन्धी निरन्तरबन्धी सान्तर-निरन्तरबन्धी १-८ १ -/
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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