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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-३८४ उपशमक अपूर्वकरण | बद्धायुष्क | की अपेक्षा तृतीय स्थान बदायुष्कसम्बन्धो द्वितीय स्थान की १४२ प्रकृतियों में से दर्शन मोहनीय की तीन प्रकृति कम की। यह जीव क्षायिकसम्यग्दृष्टि होने से तीर्थङ्कर प्रकृति वाला हो सकता है। ५ भंग, भुज्यमानमनुष्यायु-बध्यमानदेवायु। उपशमक | अबद्धायुष्क अपूर्वकरण | | की अपेक्षा तृतीय स्थान उपर्युक्त १३९ प्रकृति में से १ बध्यमानआयु कम की। १ भग, भुज्यमानमनुष्यायु! १ । १४५ उपशमक अपूर्वकरण बद्धायुष्क की अपेक्षा चतुर्थ स्थान १४५ (१४८-३, आयु २, तीर्थङ्कर) १ भंग, भुज्यमानमनुष्यायु-बध्यमानदेवायु। उपशमक अपूर्वकरण अबद्धायुष्क को अपेक्षा चतुर्थ स्थान ___ उपर्युक्त १४५ प्रकृति में से बध्यमानआयु कम करने से १४४ प्रकृति की सत्ता है। १. भंग, भुज्यमानमनुष्यायु। उपशमक बद्धायुष्क अपूर्वकरण | की अपेक्षा पंचम स्थान बद्धायुष्क की अपेक्षा चतुर्थ स्थान की १४५ प्रकृति में से अनन्तानुबन्धी ४ कषाध कम की। १ भंग, मनुष्यायु (भुज्यमान)बध्यमानदेवायु। उपशमक अपूर्वकरण अबद्धायुष्क की अपेक्षा | पंचम स्थान उपर्युक्त १४१ प्रकृति में से १ बध्यमानआयु कम की। | १ भंग, भुज्यमानमनुष्यायु ।
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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