________________
गोम्मटसार कर्मकाण्ड-३८३ बध्यमानदेवायु घटाने पर अबद्धायुष्क के १२ स्थानों में प्रकृतियों की संख्या जानना । इन २४ स्थानों में एक-एक ही भंग होता है। यहाँ बध्यमान आयु के स्थानों में तो भुज्यमानमनुष्यायु और बध्यमानदेवायु रूप ही एक भंग जानना और अबद्धायुष्क स्थानों में भुज्यमानमनुष्यायुरूप एक भंग जानना। इस प्रकार उपशमक अपूर्वकरण गुणस्थानवी जीवों के २४ स्थान और २४ ही भंग होते हैं।
उपशमकापूर्वकरण गुगतान जम्बन्धी प्रस्थान--भंग और प्रकृति संख्यासम्बन्धी विशेषविवरण सहित संदृष्टि -
सरच
गुणस्थान
प्रकृति
भंगसंख्या
विशेष
स्थान
संख्या
उपशमक अपूर्वकरण
बद्धायुष्क की अपेक्षा प्रथम स्थान
१४६ | १४६ (१४८-२, नरकायु-तिर्यञ्चायु) .
१ भंग, भुज्यमानमनुष्यायु-बध्यमानदेवायु।
।
१
।
उपशमक अपूर्वकरण
| अबद्धायुष्क
की अपेक्षा प्रथम स्थान
१४५ | १४५ (उपर्युक्त १४६ प्रकृति में से १ बध्यमान
आयु कम करने पर १४५ प्रकृति की
सत्ता) १ भंग, भुज्यमानमनुष्यायु,
१
उपशमक बद्धायुष्क । अपूर्वकरण | की अपेक्षा
द्वितीय स्थान
। १४२ | १४२ (बद्धायुष्क के प्रथम स्थान की १४६
प्रकृति में से अनन्तानुबन्धी चार कषाय
कम की) १ भंग, भुज्यमान मनुष्यायु-बध्यमानदेवायु ।
१
।
उपशमक अपूर्वकरण
अबद्धायुष्क की अपेक्षा द्वितीय स्थान
१४१ | १४१ (१४२ उपर्युक्त प्रकृतियों में से १
बध्यमान आयु कम करने पर १४१
प्रकृति की सत्ता है) १ भंग, भुज्यमानमनुष्यायु।