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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-३७० असंयतगुणस्थानके ४० सत्त्वस्थान व १२० भङ्गोंकी संक्षिप्तसन्दृष्टि - प्रथमपंक्ति | दो व तीन अनंतानुसंधी | मिथ्यात्व-सम्यग्मिथ्या- सम्यक्त्व आरमादितुष्करहिन । पहित. रहित । दिन जोड़ १४० ५स्थान १० भा तीर्थरसहित अबद्धा-बद्धा युष्क | युष्क तीन आयु| दो आयु रहित | रहित १३८ । ५स्थान द्वितीयपंक्ति १४० १३९ ५स्थान २० भग युष्क रहित नीर्थङ्करहित अबद्धा-बद्धातीन आयु, दो आयु युष्क | रहित १३८ ५ स्थान १७ भङ्ग तृतीयपंक्ति १३५ ५ स्थान १० भज तीर्थरसहितव आहा.चनुस्करहित अबद्धा- बद्धा युष्क | युष्क तीन आयु दो आयु रहित | रहित १३६ ५स्थान १३ भङ्ग ___ चतुर्थपंक्ति १३४ ५स्थान २०भन तीर्थकर व असहारक चतुष्करठित अबद्धा- बद्धा युष्क | युष्क तीन आयु दो आयु रहित | रहित १३५ १३३ ५स्थान १७ भग असंयतगुणस्थानसम्बन्धी सर्वसत्त्वस्थान तथा सर्वभङ्गों का योग ४० स्थान १२० भङ्ग
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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