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गोम्मटसार कर्मकाण्ड-३२४
पञ्चेन्द्रिय और त्रसकायमार्गणा में असत्त्व-सत्त्व-सत्त्वव्युच्छित्तिसम्बन्धी सन्दृष्टि
४८, गुणस्थान १४
सत्व व्युच्छित्ति
| असत्त्व
सत्व
गुणस्थान मिथ्यात्व
सासदिन
मिश्र
१४७
असंयत देशसंवत
विशेष (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के अनुसार) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के अनुसार) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के अनुसार) (गाधा ३४२ की सन्दृष्टि के अनुसार) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के अनुसार) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के अनुसार) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के अनुसार) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के अनुसार) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के अनुसार)
१४७
प्रमत्त
१४६
१४६
१३८
अप्रमत्त अपूर्वकरण अनिवृत्तिकरण | १०
भाग १ भाग २
१३८
भाग ३
भाग ४
भाग ५
भाग ६
भाग ७
भाग ८
१०४
(गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के अनुसार) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के अनुसार) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के सभान) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के समान) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के समान) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के समान) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के समान) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के समान) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के सम्मान) (उपशमसम्यक्त्वसहित उपशमश्रेणी की अपेक्षा) (आयुबन्ध बिना क्षायिक सम्यक्त्वसहित उपशमश्रेणी की अपेक्षा) (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के समान) | (गाथा ३४२ की सन्दृष्टि के समान)
भाग ९
१०३
सूक्ष्मसाम्पराय
१०२
१४६
उपशान्त कषाय
१३८
क्षीणकषाय
६
सयोगकेवली ।