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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-३२३ सर्वभवनत्रिकदेव-देवियों व कल्पवासिनीदेवियों के तीर्थङ्कर और नरकायु का सत्त्व नहीं होने से सत्त्वयोग्य प्रकृति १४६ हैं एव गुणस्थान ४ हैं। मिथ्यात्व-मिश्न और असंयतगुणस्थान में असत्त्व और सत्त्वव्युच्छित्ति का सर्वथा अभाव है, किन्तु सासादनगुणस्थान में आहारकद्विकका असत्त्व, सत्त्व १४४ प्रकृतियों का, सत्त्वव्युच्छित्ति का यहाँ भी अभाव है। भवनत्रिकदेव-देवियों और कल्पवासिनीदेवियों में असत्त्व-सत्त्व-सत्त्वव्युच्छित्तिसम्बन्धी सन्दृष्टि सत्त्वयोग्यप्रकृति १४६, गुणस्थान ४ गुणस्थान असत्त्व सत्व विशेष सत्त्व व्युच्छित्ति मिथ्यात्व १४६ सासादन | २ (आहारकद्विक) मिश्र १४६ असंवत आगे इन्द्रिय और कायमार्गणा में सत्त्वादि का कथन करते हैं - ओघं पंचक्खतसे, सेसिंदियकायगे अपुण्णं वा । तेउदुगे ण णराऊ सव्वत्थुव्वेल्लणावि हवे ॥३४९॥ अर्थ- पञ्चेन्द्रिय और त्रसकाय में सामान्य से गुणस्थानवत् ही सत्त्वादिका कथन है, सत्त्वयोग्य प्रकृति १४८ हैं। शेष एकेन्द्रिय से चतुरिन्द्रियपर्यन्त तथा पृथ्वी से वनस्पतिकायपर्यन्त लब्ध्यपर्याप्तकतिर्यञ्च के समान १४५ प्रकृतियों की सत्ता है, किन्तु तेजकाय और वायुकाय में मनुष्यायु का सत्त्व नहीं है अत: इन दोनों के १४४ प्रकृति का सत्त्व पाया जाता है। इन्द्रिय और कायमार्गणा में सर्वत्र प्रकृतियों की उद्वेलना भी होती है। विशेषार्थ- इन्द्रिय और कायमार्गणा में पञ्चेन्द्रिय और त्रसकायमार्गणा में सत्त्वप्रकृति १४८ हैं, गुणस्थान १४ हैं। सत्त्वादि का सर्वकथन गुणस्थानवत् जानना। अवशेष एकेन्द्रिय, द्वीन्द्रिय, त्रीन्द्रिय, चतुरिन्द्रियमार्गणा में एवं पृथ्वीकाय, जलकाय और वनस्पतिकायमार्गणा में लब्ध्यपर्याप्तकवत् तीर्थङ्कर, नरकायु और देवायुबिना सत्त्व प्रकृति ५४५ हैं और गुणस्थान दो हैं। यहाँ मिथ्यात्वगुणस्थान में असत्त्व नहीं है, सत्त्व १४५ प्रकृतियों का सासादनगुणस्थान में असत्त्व आहारकद्विक का, सत्त्व १४३ प्रकृति का। तेजकाय, वायुकाय में मनुष्यायु का भी सत्त्व नहीं होने से सत्त्वप्रकृति १४४ हैं। गुणस्थान एक मिथ्यात्व
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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