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________________ सासादन गोम्मटसार कर्मकाण्ड-२७६ स्त्रीवेद में उदयव्युच्छित्ति-उदय-अनुदयसम्बन्धी सन्दृष्टि उदययोग्यप्रकृति १०५, गुणस्थान ९ उदयगुणस्थान व्युच्छित्ति उदय अनुदय विशेष मिथ्यात्व २ (सम्यक्त्व, सम्यग्मिध्यात्व) १ (मिथ्यात्व) | ७ (अनन्तानुबन्धीकषाय ४, देव-मनुष्य व तिर्यञ्चगत्यानुपूर्वी) मिश्र | ९ (७+३-१०-१ सम्यग्मिथ्यात्व) १ (सम्यग्मिथ्यात्व) असंयत २ (९+१=१०-१ सम्यक्त्व) ११ (अप्रत्या ख्यानकषाय ४,देवमति, देवायु, वैक्रियकद्विक, दुर्भग, अनादेय, अयश.) देशसंयत | ८ (गाथा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार) प्रमत्तसंयत ३ (स्त्यानगृद्धिआदि तीननिद्रा) अप्रमत्त ४ (गाधा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार) अपूर्वकरण ६ (गाथा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार) अनिवृत्तिकरण । ६४ ४१ ६४(गाथा ३२० की सन्दृष्टि अनुसार) नपुंसकवेद में उदययोग्य प्रकृति ११४, गुणस्थान ९ हैं। यहाँ मिध्यात्व गुण स्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति मिथ्यात्व, आतप, सूक्ष्म, साधारण और अपर्याप्त ये ५, उदयप्रकृति ११२, अनुदयप्रकृति सम्यग्मिध्यात्व, सम्यक्त्व ये दो। सासादनगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति अनन्तानुबन्धीकषाय ४, एकेन्द्रिय, स्थावर, विकलत्रय, मनुष्य व तिर्यञ्चगत्यानुपूर्वी ये ११, उदयप्रकृति १०६, अनुदयप्रकृति ८। मिश्रगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति १ सम्यग्मिथ्यात्व, उदयप्रकृति ९६, अनुदयप्रकृति १८ । असंयतगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति अप्रत्याख्यानकषाय ४, वैक्रियिकद्विक, नरकद्विक, नरकायु, दुर्भग, अनादेय, अयशस्कीर्ति ये १२ उदयप्रकृति ९७, अनुदयप्रकृति १७। देशसंयतगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति गुणस्थानोक्त८, उदयप्रकृति ८५, अनुदयप्रकृति २९ । प्रमत्तगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति स्त्यानगृद्धिआदि निद्रा तीन, उदयप्रकृति ७७, अनुदयप्रकृति ३७। अप्रमत्तगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति सम्यक्त्व और अन्तिम तीन संहनन ये ४, उदयप्रकृति ७४, अनुदयप्रकृति ४० । अपूर्वकरणगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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