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गोम्मटसार कर्मकाण्ड-२७४ में व्युच्छिन्नप्रकृति १ मिथ्यात्व, उदयप्रकृति १०३, अनुदयप्रकृति सम्यग्मिथ्यात्व, सम्यक्त्व और आहारकद्विक। सासादनगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति अनन्तानुबन्धीकी ४ कषाय, उदयप्रकृति १०२, अनुदयप्रकृति ५। मिश्वगुणस्थान में सम्यग्मिथ्यात्वकी व्युच्छित्ति,उदयप्रकृति ९६ तथा तीनआनुपूर्वी के उदय का अभाव होने से एवं सम्यग्मिथ्यात्व का उदय होने से अनुदयप्रकृति ११ । असंयतगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति अप्रत्याख्यानकषाय चार, वैक्रियिकद्विक, सुरद्विक, देवायु, मनुष्य-तिर्यञ्चगत्यानुपूर्वी, दुर्भग, अनादेय, अयशस्कीर्ति १४, उदयप्रकृति ९९, सम्यक्त्व और तिर्यञ्च-मनुष्यदेवगत्यानुपूर्वीका उदय होने से अनुदयप्रकृति ८ । देशसंयतगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति ८, उदयप्रकृति ८५, अनुदयप्रकृति २२। प्रमत्तगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति ५, उदयप्रकृति आहारकद्विकसहित ७९, अनुदयप्रकृति २८। अप्रमत्तगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति ४. उदयप्रकति...७४. अनुयप्रकति ३३ । अपूर्वकरणगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति ६, उदयप्रकृति ७०, अनुदयप्रकृति ३७। अनिवृत्तिकरणगुणस्थान के सवेदभाग में पुरुषवेद तथा अवेदभागसम्बन्धी सवलनक्रोध-मान-माया, १० वें की सूक्ष्मलोभ, ११ वें की वज्रनाराच व नाराच सहनन, क्षीणकषायगुणस्थान की १६ और तीर्थक्करबिना शेष ४१ प्रकृति सयोगकेवली सम्बन्धी इस प्रकार व्युच्छिन्नप्रकृति ६४ हैं, क्योंकि सवेदभाग के आगे वेद का उदय नहीं है। उदयप्रकृति ६४ और अनुदयप्रकृति ४३ है।
पुरुषवेद में उदयव्युच्छित्ति-उदय-अनुदयसम्बन्धी सन्दृष्टि
उदययोग्यप्रकृति १०७, गुणस्थान ९
उदयगुणस्थान | व्युच्छित्ति मिथ्यात्व
सासादन
भिश्न
उदय | अनुदय
विशेष |४ (सम्यग्मिथ्यात्व, सम्यक्त्व, आहारकद्विक)
१ (मिथ्यात्व) ५ ४ (अनन्तानुबन्धीकषाय) ११ |११(५+४=९+३ आनुपूर्वी (नरकगत्यानुपूर्वीबिना)
और सम्यग्मिथ्यात्वका उदय है अत: उसे कम
किया) ९९ ८ ८ (११+१=१२-४, तीनआनुपूर्वी और
सम्यक्त्व) १४(अप्रत्याख्यानकषाय ४, वैक्रियकद्विक, देवायु,
मनुष्य व तिर्यञ्चगत्यानुपूवीं, देवद्रिक, दुर्भग, अनादेय, अयश)
असंयत
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