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गोम्मटसार कर्मकाण्ड - २६३
प्रकृति का । मिश्रगुणस्थान में व्युच्छित्ति सम्यग्मिथ्यात्व की, उदय १०० प्रकृति का, अनुदय ९ प्रकृति का। असंयतगुणस्थान में व्युच्छित्ति १३ प्रकृति की, क्योंकि चारों गत्यानुपूर्वी का उदय तो परभव के लिए गमन करते समय होता है और मनोयोग तथा वचनयोग अपनी-अपनीपर्याप्ति अर्थात् मनपर्याप्ति और बच्चनपर्याप्ति पूर्ण होने के पश्चात् होते हैं अतः यहाँ आनुपूर्वी को नहीं कहा। असंयतगुणस्थान में उदयप्रकृति १०० और अनुदयप्रकृति ९ हैं। देशसंयतगुणस्थान में प्रत्याख्यानकषाय ४, तिर्यञ्चायु, उद्योत, नीचगोत्र और तिर्यञ्चगति की व्युच्छित्ति, ८७ प्रकृति का उदय, २२ प्रकृति का अनुदय है । प्रमत्तगुणस्थान में व्युच्छित्ति ५ प्रकृति की, उदय ८१ प्रकृति का, अनुदय २८ प्रकृति का अप्रमत्तगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति ४. उदयप्रकृति ७६ तथा ३३ अनुदयप्रकृति हैं । अपूर्वकरणगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति ६, उदयप्रकृति ७२, अनुदयप्रकृति ३७ । अनिवृत्तिकरणगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति ६, उदयप्रकृति ६६, अनुदयप्रकृति ४३। सूक्ष्मसाम्परायगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति १, उदयप्रकृति ६०, अनुदयप्रकृति ४९ । उपशान्तमोहगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति २, उदयप्रकृति ५९ और अनुदयप्रकृति ५०- हैं । क्षीणमोहगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति १६, उदयप्रकृति ५७, अनुदयप्रकृति ५२ । सयोगकेवलीगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति ४२ हैं, क्योंकि अयोगकेवलीगुणस्थान में योग का अभाव है अतः योगकेवलीगुणस्थान में व्युच्छिन्न होनेवाली १२ प्रकृतियाँ भी सयोगकेवलीगुणस्थान में ही व्युच्छित्ति को प्राप्त होती हैं। सयोगकेवली के उदयप्रकृति भी ४२ हैं तथा अनुदय ६७ प्रकृति का पाया जाता है। सत्य-असत्य - उभय वचनयोगसम्बन्धी
सत्यादि चार मनोयोग तथा उदयव्युच्छित्ति उदय अनुदय की सन्दृष्टि
गुणस्थान
मिथ्यात्व
सासादन
मिश्र
असंयत
उदय
व्युच्छित्ति उदय अनुदय
१
१०४
५
४
१
उदययोग्य प्रकृति १०९, गुणस्थान १३
१३
१०३
१००
१००
६
९
९
विशेष
१ ( मिध्यात्व ) ५ ( गाथा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार )
४ ( अनन्तानुबन्धी कषायचतुष्क)
९ (६+४ = १० -१ सम्यग्मिथ्यात्व ) १ ( सम्यग्मिथ्यात्व )
९ ( ९ + १ = १०१ सम्यक्त्व ) १३
( अप्रत्याख्यानकषाय ४ वैक्रियकशरीर, वैक्रियक अंगोपांग, देवायु, नरकायु, देवगति, नरकगति, दुभंग, अनादेय, अयशस्कीर्ति)