________________
गोम्मटसार कर्मकाण्ड - २५८
६० का, अनुदय ५४ का। उपशान्तमोहगुणस्थान में व्युच्छित्तिरूप प्रकृति २, उदयप्रकृति ५९ और अनुदयप्रकृति ५५। क्षीणमोहगुणस्थान में व्युच्छित्ति १६ की, उदय ५७ प्रकृति का और अनुदय भी ५४ प्रकृति का है । सयोगकेवलीगुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति ३०. उदयप्रकृति ४२, अनुदयप्रकृति ७२३३ अयोगकेवलीगुणस्थान में व्युच्छित्तिरूप प्रकृति १२, उदयरूप प्रकृति १२ तथा अनुदय प्रकृति १०२ हैं। पञ्चेन्द्रिय के उदयव्युच्छित्ति- उदय- अनुदयसम्बन्धी सन्दृष्टिउदयोग्य प्रकृति ११४, गुणस्थान १४
गुणस्थान
मिथ्यात्व
साखादन
मिश्र
असंयत
उदय
व्युच्छित्ति
२
४
१
१७
देशसंयत
प्रमत्त
अप्रमत्त
अपूर्वकरण अनिवृत्तिकरण
६
१.
सूक्ष्म साम्पराय उपशान्तमोह २
१६
क्षीणमोह सयोगकेवली ३०
अयोगकेवली १२
૪
उदय
१०९
१०६
१००
१०४
وام
८१
७६
७२
६६
६०
५९
45
20
४९
१२
अनुदय
५
८
१४
१०
今か
३३
३८
૪૨
४८
५४
५५
५७
७२
विशेष
५ ( तीर्थंकर आहारकद्विक, सम्यग्मिथ्यात्व, सम्यक्त्व)
८ (५+२+१ नरकगत्यानुपूर्वी ) ४ (अनन्तानुबन्धीकषाय )
१४ (८+४+नरकगत्यानुपूर्वीबिना ३ आनुपूर्वी - १ सम्यग्मिथ्यात्व )
( सम्यग्मिथ्यात्त्व)
१
१० तीर्थंकर आहारकद्विक, अनन्तानुबन्धी की ४ कषाय, सम्यग्मिथ्यात्व, मिथ्यात्व और अपर्याप्त)
१७ (गाथा २६४ की सन्दृष्टि के अनुसार ) ८ ( गाथा २६४ की सन्दृष्टि के अनुसार ) ३३ (२७+८-२ आहारकद्विक)
४ ( गाथा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार ) ६ ( गाथा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार ) ६ ( गाथा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार ) १ ( गाथा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार ) २ ( गाथा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार ) १६ ( गाथा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार ) ७२ (५७+१६ - १ तीर्थंकरप्रकृत्ति ) ३० ( गाथा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार ) १२ ( गाथा २६४ की सन्दृष्टि अनुसार )
१०२
॥ इति इन्द्रियमार्गणा ॥