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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-२२८ १७, देशसंयत्तगुणस्थान में ८, प्रमत्तगुणस्थान में ५, अप्रमत्तगुणस्थान में ४, अपूर्वकरणगुणस्थानमें ६, अनिवृत्तिकरणगुणस्थान में ६, सूक्ष्मसाम्परायगुणस्थान में १, उपशान्तमोहगुणस्थानमें २, क्षीणमोहगुणस्थान में २ और १४, सयोगकेवली के. २९. एकतिकी उदयन्युच्छित्ति है, क्योंकि नानाजीवों की अपेक्षा साता और असाता दोनों ही वेदनीयकी व्युच्छित्ति नहीं है। अयोगकेवली के १३ प्रकृति की ! उदयव्युच्छित्ति जानना। मिथ्यात्वगुणस्थान में उदय ११७, तीर्थङ्कर, आहारक द्विक, मिश्रमोहनीय और ! सम्यक्त्वमोहनीयका उदय नहीं होने से पाँचप्रकृति का अनुदय है। सासादनगुणस्थान में उदय १०६ प्रकृति का, मिथ्यात्वगुणस्थान की व्युच्छिन्नप्रकृति १० और नरकगत्यानुपूर्वी इस प्रकार से ११ का उदय न होने से अनुदय १६ का। मिश्रगुणस्थान में उदयरूपप्रकृति १००, सासादनसम्बन्धी ४ और तीनआनुपूर्वी का उदय नहीं है तथा मिश्रप्रकृति के मिलने से अनुदयप्रकृति २२ । असंयतगुणस्थान में उदययोग्यप्रकृति १०४,आनुपूर्वी ४ और सम्यक्त्वमोहनीय मिलने से तथा मिश्रमोहनीयगुणस्थान की मिश्रगुणस्थान में ही व्युच्छित्ति हुई अतः १८ प्रकृति का अनुदय है। असंयत में व्युच्छित्ति १७ प्रकृति की है इसलिए देशसंयतगुणस्थान में उदयप्रकृति ८७ और अनुदयप्रकृति ३५। प्रमत्तगुणस्थान में आहारकद्विकसहित तथा देशसंयतगुणस्थान की व्युच्छिन्नप्रकृति ८ बिना उदयप्रकृति ८१ और अनुदयप्रकृति ४१ हैं। प्रमत्तगुणस्थान में व्युच्छिन्न होने वाली ५ प्रकृतियों के बिना अप्रमत्तगुणस्थान में उदयप्रकृति ७६ और अनुदय ४६ प्रकृति का है। अप्रमत्तगुणस्थान में व्युच्छिन्न प्रकृति ४ हैं अतः उनके बिना अपूर्वकरणगुणस्थान में उदय ७२ प्रकृति का है,अनुदय ५० प्रकृति का है। अपूर्वकरणगुणस्थान में व्युच्छित्तिरूपप्रकृति ६ कहीं हैं उनके बिना अनिवृत्तिकरणगुणस्थान में उदयरूप प्रकृति ६६ एवं अनुदयरूप प्रकृति ५६ हैं। अनिवृत्तिकरणगुणस्थान में उदय से व्युच्छिन्न प्रकृति ६ हैं अतः इनके बिना सूक्ष्मसाम्परायगुणस्थान में उदय प्रकृति ६० एवं अनुदय ६२ प्रकृति का है। यहाँ व्युच्छिन्नरूपप्रकृति १ कही गई है। इसी कारण ५ प्रकृति बिना उपशान्तमोह गुणस्थान में उदयप्रकृति ५९, अनुदयप्रकृति ६३ हैं। इस गुणस्थान में व्युच्छिन्नप्रकृति दो हैं अतः इन दो प्रकृति के बिना क्षीणमोहगुणस्थान में उदयप्रकृति ५७, अनुदयप्रकृति ६५ हैं। क्षीणमोहगुणस्थान में व्युच्छिन्नरूप १६ प्रकृति के बिना तथा तीर्थङ्करप्रकृति के मिलने से सयोगकेवली के उदय प्रकृति ४२ एवं अनुदयप्रकृति ८० हैं। इसी गुणस्थान में व्युच्छिन्न होनेवाली २९ प्रकृतियाँ कही हैं, उनके बिना अयोगकेवलीगुणस्थान में उदयरूपप्रकृति १३ तथा अनुदय प्रकृति १०९ हैं।
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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