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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड-१९९ SHARMAtta -EBER 2 E-HE BALFIE SHE只 समय प्रायोग्य मम शक्तिवाले योगस्थान • समय प्रायोपाध्यम शक्तिवाले योगस्थान शक्तिवाले योगम्थान ५ समय प्रायोग्य मम शक्तिवाले " समय प्रायोए नव्या योगस्थान ६ समय प्रायोग्य यम योगस्थान "कालापेक्षा योग-यवमध्यरचना" ५ समय प्रायोग्बा यम योगस्थान AIRKata ४ समय प्रायोम्य मात्राम योगस्थान ३ समय प्रायोग्य मध्यम पोगस्थान २ समय प्रायोग्य उत्कृष्ट अनुत्कृष्ट शक्तिवाले योगस्थान आगे पर्याप्तत्रसजीवों के परिणामयोगस्थानों में जीवों का प्रमाण कहते हैं - मझे जीवा बहुगा, उभयत्थ विसेसहीणकमजुत्ता। हेट्टिमगुणहाणिसलादुवरि सलागा विसेसऽहिया ॥२४४॥ दव्वतियं हेढुवरिमदलवारा दुगुणमुभयमण्णोण्णं । जीवजवे चोद्दससयबावीसं होदि बत्तीसं ॥२४५।। चत्तारि तिण्णि कमसो, पण अड अटुं तदो य बत्तीसं । किंचूणतिगुणहाणिविभजिदे दो दु जवमझं ॥२४६।। अर्थ : जीवों के प्रमाणरूप यवरचनाके बीच में जीव बहुत हैं। ऊपर तथा नीचे क्रम से विशेष हीनरूप कम-कम हैं। अधस्तनगुणहानिशलाकासे उपरितनगुणहानिशलाका विशेष अधिक है।।२४४॥ द्रव्य के तीन अनुयोगद्वार हैं-जीवों का प्रमाण,योगस्थान-अध्वान और गुणहानिआयाम। इनमें से उपरितन और अधस्तम गुणहानि-गुणहानिप्रति द्रव्य दुगुने-दुगुने होते चले गए हैं,किन्तु दोनों ओर के द्रव्यका प्रमाण भिन्न-भिन्न है। अङ्कसन्दृष्टि में यवमध्यके सर्वजीवों का प्रमाण १४२२ है तथा योगस्थानअध्वान ३२ हैं और एकगुणहानिआयाम ४ है। अधस्तननानागुणहानि ३, उपरितननानागुणहानि ५ इस प्रकार सर्वनानागुणहानि ८, अधस्तनअन्योन्याभ्यस्तराशि २४२४२-८ और उपरितनअन्योन्याभ्यस्तराशि
SR No.090180
Book TitleGommatasara Karma kanda
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherShivsagar Digambar Jain Granthamala Rajasthan
Publication Year
Total Pages871
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Discourse, Philosophy, & Religion
File Size20 MB
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