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७८८/गो. सा. जीवका
गाथा ७३४
अन्त में नेमिचन्द्राचार्य अशीर्वचनात्मक माथा कहते हैं प्रज्जज्जसेणगुणगरगसमूह संधारि अजियसेरणगुरू ।
भुवरण गुरू जस्सगुरू सो राम्रो गोम्मटो जयउ ॥७३४॥ गाथार्थ-आर्य आर्यसेन के बहुत गुणों के समूह का संधारमा करने वाले अजिनमेन गुरु-जो त्रिभुवन के गुरु हैं- वे जिराके गुरु हैं, वह गोम्मट राजा जयवन्त वर्तो ।