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________________ कामा ४३ गुणस्थान /४५ द्वितीय प्रस्तार की अपेक्षा प्रमाव के साढ़े सैंतीस हजार (३७५००) भङ्गों में नष्ट-उद्दिष्ट ज्ञात करने का यंत्र शक्ति ५ पंक्ति ४ पंक्ति ३ पंक्ति २ पंक्ति । सह २ | निद्रा ५ । इन्दिय ६ | कषाय २५ विधा। ० | रसमा ६२५ मन. मान -१२५० लेह. स्त्यानद्धि ० ग्रन, कोष स्त्रीकथा | निद्रानिद्रा मर्थकथा १८७५० ३७५० H०० प्रथलाप्रचला अन. माया २५४२=५० भोजनकथा २५] ३७५०x२धारण ६२५४२ ग्रन लोभ २५४३-७५ राजकथा अप्रत्या. कोध २५४४-१०० +२५) निद्रा चक्षु ६२५४३ अप्रत्या. र २५ -११ होरकथा ३७५०४३११२५० अप्रत्या. मापा २५४६= १५० दरकथा ३७५३४४ श्रोत्र ६२५४४ अप्रत्या. लोभ २५४७%2१७५ परपाखण्डकथा =१५००० =२५०० प्रत्या, क्रोध २५४८=२०० देशकथा प्रत्या. मान २५४६%२२५ मन ६२५५ भापीकथा ३१२५ प्रत्या, माया २५-१०-२५० प्रत्या, लोभ २५-११-२७५ गुणवन्धकथा संज्य, क्रोध २५४१२-३०० देवीकथा सज्व, मान २५४१३:.:. ३२५ निष्ठुरकथा संज्व. माया २५४१४ =३५० लोट : द्वितीय प्रस्तार में प्रथम प्रस्तार संज्व. लोभ २५४१५-३७५ परपशुन्यकथा की अपेक्षा मुख्यतः यही भेद है कि हास्य २५४१६-४०० कन्दर्पकथा यंत्र में विकथा, कषाय, इन्द्रिय, रति २५४१७-४२५ देशकालानुचितकथा निद्रा व स्नेह की पंक्तियों के क्रमांक अरति. २५४१५='४५० अण्डकथा क्रमशः १, २, ३, ४, ५ होते हैं, २५-११-४७५ जो प्रथमप्रस्तार से ठीक उलटे हैं, मूर्ख कथा २५४२०- ५०० यंत्र बनाने की शेषविधि वही है जुगुप्सा २५४२१-५२५ प्रात्मप्रशंमा कथा जैसी कि विशेषार्थ में कही है। स्त्रीवेद २५४२२-५५० परपरिवादका पुरुषवेद २५४२३ - ५७५ परजुगुप्साका नघु सकवेद २५४२४ = ६०० परपीडाकथा गोक कलहकथा परिग्रहकथा कृध्याद्यारम्भकथा संगीतवाद्यकथा
SR No.090177
Book TitleGommatsara Jivkand
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherRaghunath Jain Shodh Sansthan Jodhpur
Publication Year
Total Pages833
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, & Principle
File Size22 MB
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