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________________ गोम्मटसार : जीवकाण्ड * विषय-सूची * विषय पृष्ठ विषय १०१ १०३ ११४ मंगलाचरण बीस प्ररूपणा प्रोध व पादेश का स्पष्टीकरण मार्गणाओं में विभिन्न प्रहपणामों का अन्तर्मान गुणस्थान लक्षण गुगास्थान निर्देश गुणस्थानों में भाव गुणस्थान प्रलपणा अधिकार मिध्यान्व : लक्षण व भेद सासादन सम्बग्मिध्वात्व सायोपामिक सम्यक्त्व औरमिक क्षामिक समकित पंचम मुसास्थान प्रमत्तसयत प्रमाद के ५ भेद ३७ हजार मंगों का नक्शा अप्रमत्तसपत अधकरण अपूर्वकरण अनिवृत्तिकरगा नया स्पर्धक व कृष्टि प्ररूपण सूक्ष्म साम्पराय उपशान्तप्राय क्षीणकषाय सयोगबली प्रायजितकरण केवली समुद्घात योगनिरोध योग कृष्टियाँ सक्षमक्रिया अप्रतिपाती ध्यान नयोगकेवली गूणधैरिगनिर्जरा के ११ स्थान सिखों का स्वरूप अन्य मत परिहार जीवसमास प्ररूपणा अधिकार निरूक्ति जीवसमास का लक्षण जीवसमास के भेद स्थान, योनि, अवगाहना, कुल विभिन्न वोनियों में जन्म गर्भादि जन्म योनि संख्या गांत तथा जन्म में संबंध विभिन्न गतियों में वेद अवगाहना मत्स्य-रचना कूलों द्वाग जीवसमासों का कथन पर्याप्ति प्ररूपणा अधिकार लक्षण व भेद ७४ | म्मामी ७६ | पर्याप्तियों के प्रस्थापन व निष्ठापन ७६ | में काल ११८ ११६ १२१ १२८ १३३ १३४ १३५ १५४ १५७ १६१ [ ३५ ]
SR No.090177
Book TitleGommatsara Jivkand
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Siddhant Chakravarti, Jawaharlal Shastri
PublisherRaghunath Jain Shodh Sansthan Jodhpur
Publication Year
Total Pages833
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, & Principle
File Size22 MB
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