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________________ २*८* छडो काल द्रव्यनो समय कोइ कोइथी मिलतो नयी केमके एक समय विणत्या पछे बीजो समय आवे छे माटे काल अस्तिकाय नथी ए द्रव्यमां अस्तित्व पणो कह्यो. २ वस्तुत्व केहतां वस्तुपणो कहे छे ते द्रव्य छए एकठा एक खेत्र मध्ये रह्या छे एक आकाश प्रदेशमां धर्मास्तिकायनो एक प्रदेश रह्यो छे तथा अधर्मास्तिकायनो पण एक प्रदेश रह्यो छे अने जीव अनंताना अनंता प्रदेश रह्या छे पुद्गल परमाणु अनंता रह्या छे ते सर्व पोतानी सत्ता लीधा थका रह्या छे पण कोइ द्रव्य कोइ द्रव्य साधे मिली जातो नथी ते वस्तु पणो. ३ द्रव्यत्व केहतां द्रव्यपणो ते सर्व द्रव्यपोतपोतानी क्रिया करे एटले धर्मास्तिकायमां चलणगुण ते सर्व प्रदेश मध्ये छे सदा कालें पुद्गल तथा जीवने चलावया रूपक्रिया करे छे इहां कोइ पुछे जे लोकान्त सिद्धखेत्रमां धर्मास्तिकाय छे। ते सिद्धना जीवने चलावत्रापणो करती नथी ते केम? तेने उत्तर कहे छे जे सिद्धना जीव अक्रिय छे माटे चालता नथी पण ते खेत्रमां जे सूक्ष्म निगोदना जीव तथा पुल छे तेहने धर्मास्तिकाय चलावे छे माटे पोतानी क्रिया करे छे तेमज अधर्मास्तिकाय जीव तथा पुद्गलने स्थिर रखवानी क्रिया करे छे तथा आकाशद्रव्य ते सर्व द्रव्यने अवगाहना रूपकार्य करे छे इहां कोइ पूछे जे अलोकाकाशमां तो वीजुं कोइ द्रव्य नथी तो अलोकाकाश कया द्रव्यने अवगाहदान आपे छे तेने उत्तर कहे छे जे अलोकाकाशमां अवगाह करवानी शक्ति तो लोकाकाश जेवीज छे परंतु तिहां
SR No.090175
Book TitleJivvicharadiprakaransangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJindattsuri Gyanbhandar Surat
PublisherJindattsuri Gyanbhandar
Publication Year
Total Pages305
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, & Principle
File Size7 MB
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