SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 46
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ सूत्र विषय पृष्ठांक | सूत्र विषय पृष्ठांक उत्ला २०. चौबीसदंडकों में दृष्टान्तपूर्वक गति आदि की अपेक्षा उत्पत्ति का प्ररूपण, १४६३-१४६५ २१. भवसिद्धिक-अभवसिद्धिक चौबीसदंडकों में उत्पातादि का प्ररूपण, १४६५ २२. सम्यग्दृष्टि-मिथ्यादृष्टि चौबीसदंडकों में उत्पातादि का प्ररूपण, १४६५ २३. चौबीसदंडकों में एक समय में उद्वर्तित होने वालों की संख्या, १४६५ २४. चौबीसदंडकों में सान्तर-निरन्तर उद्बर्तन का प्ररूपण, १४६५ २५. चौबीसदंडकों में उद्वर्तन के विरहकाल का प्ररूपण, १४६५-१४६६ २६. उद्वर्तमानादि चौबीसदंडकों में उद्वर्तन के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १४६६-१४६७ २७. चौबीसदंडकों में अनन्तर-निर्गतादि का प्ररूपण, १४६७ २८. चौबीसदंडकों के जीवों का उद्वर्तनानंतर उत्पाद का प्ररूपण, १४६७-१४७२ २९. चौबीसदंडकों में नैरयिकों का नैरयिकों में उत्पाद और अनैरयिकों के उदवर्तन का प्ररूपण, १४७२-१४७३ ३०. चन्द्र-सूर्य का च्यवन और उपपात का प्ररूपण, १४७३-१४७५ ३१. रत्नप्रभापृथ्वी के संख्यात विस्तृत नरकावासों में उत्पन्न होने वाले नारकों के ३९ प्रश्नों का समाधान, १४७५-१४७७ ३२. रत्नप्रभापृथ्वी के संख्यात विस्तृत नरकावासों में उद्वर्तन करने वाले नारकों के ३९ प्रश्नों का समाधान, १४७७-१४७८ ३३. रत्नप्रभापृथ्वी के संख्यात विस्तृत नरकावासों में नैरयिकों के संख्यात विषयक ४९ प्रश्नों का समाधान, १४७८-१४७९ ३४. रत्नप्रभापृथ्वी के असंख्यात विस्तृत नरकावासों में उत्पाद आदि के प्रश्नों का समाधान, १४७९ ३५. शर्कराप्रभापृथ्वी से अद्यःसप्तम पृथ्वी पर्यन्त छह नरक पृथ्वियों में उत्पाद आदि के प्रश्नों का समाधान, १४७९-१४८१ ३६. भवनवासी देवों के उत्पाद आदि के ४९ प्रश्नों का समाधान, १४८१-१४८२ ३७. वाणव्यन्तर देवों के उत्पाद आदि के ४९ प्रश्नों का समाधान, १४८२ ३८. ज्योतिष्क देवों के उत्पाद आदि के ४९ प्रश्नों का समाधान, १४८२ ३९. वैमानिक देवों के उत्पाद आदि के ४९ प्रश्नों का समाधान, १४८२-१४८४ ४०. चौबीसदंडकों में आत्मोपक्रम की अपेक्षा उपपात-उद्वर्तन का प्ररूपण, १४८४-१४८५ . ४१. चौबीसदंडकों में आत्मऋद्धि की अपेक्षा उपपात-उद्वर्तन का प्ररूपण, १४८५ ४२. चौबीसदंडकों में आत्मकर्म की अपेक्षा उपपात-उद्वर्तन का प्ररूपण, १४८५ ४३. चौबीसदंडकों में प्रयोग की अपेक्षा उपपात-उद्वर्तन का प्ररूपण, १४८५-१४८६ ४४. हस्तिराज उदायी और भूतानन्द के उत्पाद-उद्वर्तन का प्ररूपण, १४८६ ४५. चौबीसदंडकों में भव्य द्रव्य नैरयिकत्वादि का प्ररूपण, १४८६-१४८७ ४६. चौबीसदंडकों और सिद्धों में कतिसंचितादि का प्ररूपण, १४८७-१४८८ ४७. कतिसंचितादि विशिष्ट चौबीसदंडक और सिद्धों का अल्पबहुत्व, १४८८ ४८. चौबीसदंडकों और सिद्धों में षट्क समर्जितादि का प्ररूपण, १४८८-१४९० ४९. षट्क समर्जितादि विशिष्ट चौबीसदंडकों . और सिद्धों में अल्पबहुत्व, १४९० ५०. चौबीसदंडकों और सिद्धों में द्वादश समर्जितादि का प्ररूपण, १४९१-१४९२ ५१. द्वादश समर्जितादि विशिष्ट चौबीसदंडकों का और सिद्धों का अल्पबहुत्व, १४९२ ५२. चौबीसदंडकों और सिद्धों में चतुरशीति समर्जितादि का प्ररूपण, १४९२-१४९३ ५३. चतुरशीति समर्जितादि विशिष्ट चौबीसदंडकों - और सिद्धों का अल्पबहुत्व, १४९४ ५४. सात नरक पृथ्वियों में सम्यग्दृष्टियों आदि का उत्पाद-उद्वर्तन और अविरहितत्व का प्ररूपण, १४९४-१४९५ ५५. नैरयिकों का प्रतिसमय अपहरण करने पर भी अनपहरणत्व का प्ररूपण, १४९५ ५६. वैमानिक देवों का प्रति समय अपहरण करने पर भी अनपहरणत्व का प्ररूपण, १४९५ ५७. चार प्रकार के देवों में सम्यग्दृष्टियों आदि की उत्पत्ति का प्ररूपण, १४९६ ५८. भव्यद्रव्य देवों का उपपात, १४९६ ५९. नरदेवों का उपपात, १४९६-१४९७ ६०. धर्मदेवों का उपपात, १४९७ (३५)
SR No.090159
Book TitleDravyanuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1995
Total Pages806
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size29 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy