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________________ सत्र विषय पृष्ठांक | सूत्र विषय पृष्ठांक ६१. देवों का देवावासांतरों की व्यतिक्रमण ऋद्धि का प्ररूपण, ६२. वाणव्यंतरों के देवलोकों का स्वरूप, १४३० १४३०-१४३१ ३८. अब्याबाध देवों के अब्याबाधत्व के कारणों का प्ररूपण, १४१२ ३९. देवों द्वारा शब्दादि के श्रवणादि के स्थानों का प्ररूपण, १४१३ ४०. लोकान्तिक देवों के मनुष्य लोक में आगमन के कारणों का प्ररूपण, १४१३ ४१. तत्काल उत्पन्न देव के मनुष्य लोक में अनागमन-आगमन के कारणों का प्ररूपण, १४१३-१४१४ ४२. देवेन्द्रों आदि के मनुष्य लोक में आगमन के कारणों का प्ररूपण, १४१४-१४१५ ४३. देवलोक में अंधकार के कारणों का प्ररूपण, १४१५ ४४. देवलोक में उद्योत के कारणों का प्ररूपण, १४१५ ४५. शक्र और ईशानेन्द्र के परस्पर व्यवहारादि का प्ररूपण, १४१५-१४१६ ४६. शक्र की सुधर्मा सभा और ऋद्धि का प्ररूपण, १४१६-१४१७ ४७. ईशान की सुधर्मा सभा और ऋद्धि का प्ररूपण, १४१७ . ४८. शक्र और ईशान के लोकपालों का विस्तार से प्ररूपण, १४१७-१४२३ , ४९. शक्र आदि बारह देवेन्द्रों की सेनाओं और सेनापतियों के नाम, १४२३-१४२४ ५०. शक्र आदि के पदातिसेनापतियों की सात कक्षाओं में देव संख्या, १४२४ ५१. अनुत्तरोपपातिक देवों के स्वरूप का प्ररूपण, १४२४-१४२५ ५२. अनुत्तरोपपातिक देवों के उपशांत मोहत्व प्ररूपण, १४२५ ५३. अनुत्तरोपपातिक देवों को अनन्त मनोद्रव्य वर्गणाओं के जानने-देखने के सामर्थ्य का प्ररूपण, १४२५ ५४. लवसप्तम देवों के स्वरूप का प्ररूपण, १४२५-१४२६ ५५. सनत्कुमार देवेन्द्र का भवसिद्धिक आदि का प्ररूपण, १४२६ ५६. हरिणैगमेषी देव द्वारा गर्भ संहरण प्रक्रिया का प्ररूपण, १४२६-१४२७ ५७. महर्द्धिकादि देव का तिर्यक् पर्वतादि के उल्लंघन प्रलंघन के सामर्थ्य-असामर्थ्य का प्ररूपण, १४२७ ५८. अल्पऋद्धिक आदि देव-देवियों का परस्पर मध्य में से गमन सामर्थ्य का प्ररूपण, १४२७-१४२९ ५९. ऋद्धि की अपेक्षा देव-देवियों का परस्पर मध्य में से व्यतिक्रमण सामर्थ्य का प्ररूपण, १४२९ ६०. देव का भावितात्मा अणगार के मध्य में से निकलने के सामर्थ्य-असामर्थ्य का प्ररूपण, १४२९-१४३० ३८. वुक्कंति अध्ययन १. उत्पाद आदि की विवक्षा से एकत्व का प्ररूपण, १४३६ २. उत्पाद आदि पदों के स्वामित्व का प्ररूपण, १४३६ ३. संसार समापन्नक जीवों की गति-आगति का प्ररूपण, १४३६ १. नरक गति, १४३६ २. तिर्यञ्च गति, १४३६-१४३७ ३. मनुष्य गति, १४३७ ४. देव गति, १४३७ ४. स्थानांग के अनुसार चातुर्गतिक जीवों की गति-आगति का प्ररूपण, १४३७-१४३८ ५. अण्डज आदि जीवों की गति-आगति का प्ररूपण, १४३९ ६. चातुर्गतिक जीवों की सान्तर-निरन्तर उत्पत्ति का प्ररूपण, १४३९ ७. चार गतियों के उपपात का विरहकाल प्ररूपण, १४३९-१४४० ८. चमरचंचा आदि में उपपात विरहकाल का प्ररूपण, १४४० ९. सिद्धगति के सिद्ध विरहकाल का प्ररूपण, १४४० १०. चार गतियों के उद्वर्तन विरहकाल का प्ररूपण, १४४० ११. चौबीसदंडकों के जीव कहाँ से आकर उत्पन्न होते हैं इसका प्ररूपण, १४४१-१४५६ १२. तिर्यक् मिश्रोपपन्नक आठ कल्पों के नाम, १४५६ १३. चौबीसदंडकों में एक समय में उत्पन्न होने वालों की संख्या, १४५६-१४५७ १४. एक समय में सिद्धों के सिद्ध होने की संख्या का प्ररूपण, १४५७ १५. चौबीसदंडकों में अनंतरोपपन्नकादि का प्ररूपण, १४५७-१४५८ १६. उत्पद्यमान चौबीसदंडकों में उत्पाद के चतुर्भगों का प्ररूपण, १४५८-१४५९ १७. चौबीसदंडकों में सान्तर-निरन्तर उत्पत्ति का प्ररूपण, १४५९-१४६० १८. सिद्धों के सान्तर-निरन्तर सिद्ध होने का प्ररूपण, १४६० १९. चौबीसदंडकों में उपपात विरहकाल का प्ररूपण, १४६०-१४६३. ( ३४)
SR No.090159
Book TitleDravyanuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1995
Total Pages806
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size29 MB
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