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________________ सूत्र विषय पृष्ठांक | सूत्र विषय पृष्ठांक ९८, ऋद्धि-अनृद्धिमंत मनुष्यों के छह प्रकारों का प्ररूपण, १३६८-१३६९ ९९. नैपुणिक पुरुषों के प्रकार, १३६९ १00. पुत्रों के दस प्रकार, १३६९ १०१. एकोरुक द्वीप के पुरुषों के आकारप्रकारादि का प्ररूपण, १३६९-१३७२ १०२. एकोरुक द्वीप की स्त्रियों के आकारप्रकारादि का प्ररूपण, १३७२-१३७५ १०३. एकोरुक द्वीप के मनुष्यों के आहारआवास आदि का प्ररूपण, १३७५-१३८० १०४. एकोरुक द्वीप में मनुष्यों की स्थिति का प्ररूपण, १३८० १०५. एकोरुक द्वीप के मनुष्यों द्वारा मिथुनक का पालन और देवलाकों में उत्पत्ति का प्ररूपण, १३८०-१३८१ १०६. हरिवर्ष-रम्यक्वर्ष में मनुष्यों के यौवन प्राप्ति समय का प्ररूपण, १३८१ १०७. क्षेत्रकाल की अपेक्षा मनुष्यों की अवगाहना और आयु का प्ररूपण, १३८१ ३७. देव गति अध्ययन १. देव शब्द से अभिहित भव्यद्रव्यदेवादि के पाँच भेद और उनके लक्षण, १३८६ २. भव्यद्रव्यदेवादि पाँच प्रकार के देवों की कायस्थिति का प्ररूपण, १३८७ ३. भव्यद्रव्यदेवादि. पाँच प्रकार के देवों के अंतरकाल का प्ररूपण, १३८७ ४. भव्यद्रव्यदेवादि पंचविध देवों का अल्पबहुत्व, १३८७-१३८८ ५. देवों के चतुर्विध वर्ग का प्ररूपण, १३८८ ६. सइन्द्र-देवस्थानों के इन्द्रों की संख्या, १३८८ ७. सइन्द्र-अनिन्द्र देवस्थानों की संख्या, १३८८ ८. देवेन्द्रों के सामानिक देवों की संख्या, १३८९ ९. आठ कृष्णराजियों के अवकाशान्तरों में लोकान्तिक विमान और देवों की प्ररूपणा, १३८९ १०. सारस्वतादि देवों की संख्या और परिवार, १३८९ ११. भवनवासी और कल्पोपपन्नक वैमानिकों के त्रायस्त्रिंशक देवों का प्ररूपण, १३८९-१३९२ १२. असुरकुमारों का ऊर्ध्वगमन सामर्थ्य प्ररूपण,१३९२-१३९३ १३. पन्द्रह विशिष्ट असुरकुमार परमाधार्मिक देवों के नाम, १३९३ १४. अन्तर्वर्ती मनुष्य क्षेत्र में ज्योतिष्कों के ऊर्वोपपन्नकादि का प्ररूपण, १३९३-१३९४ १५. अन्तर्वर्ती मनुष्य क्षेत्र में इन्द्र के च्यवनान्तर अन्य इन्द्र के उत्पात का प्ररूपण, १३९४ १६. बहिर्वर्ती मनुष्य क्षेत्र में ज्योतिष्कों के ऊोपपन्नकादि का प्ररूपण, १३९४ १७. बहिर्वर्ती मनुष्य क्षेत्र में इन्द्र के च्यवनान्तर अन्य इन्द्र के उत्पत्ति का प्ररूपण, १३९४-१३९५ १८. किल्विषिक देवों के भेद और स्थानों का प्ररूपण, १३९५ १९. आधिपत्य करने वाले इन्द्र और लोकपालों के नाम, १३९५-१३९७ २०. भवनवासी इन्द्रों की और लोकपालों की अग्रमहिषियों की संख्या का प्ररूपण, १३९७-१४०० २१. व्यंतरेन्द्रों की अग्रमहिषियों की संख्या का प्ररूपण, १४०१-१४०२ २२. ज्योतिष्केन्द्रों की अग्रमहिषियों का प्ररूपण, . १४०२ २३. वैमानिकेन्द्रों की और लोकपालों की अग्रमहिषियों की संख्या का प्ररूपण, १४०२-१४०३ २४. देवेन्द्र शक्र और ईशान के लोकपालों की अग्रमहिषियाँ, १४०३-१४०४ २५. कल्प विमानों में देवेन्द्रों द्वारा दिव्य भोगों के भोगने का प्ररूपण, १४०४-१४०५ २६. वैमानिक देवेन्द्रों की परिषदाएँ, १४०५-१४०७ २७. वैमानिक देवों के साता सौख्य और ऋद्धि आदि का प्ररूपण, १४०७ २८. वैमानिक देवों के शरीरों के वर्ण, गन्ध और स्पर्श का प्ररूपण, १४०७-१४०८ २९. वैमानिक देवों की विभूषा और कामभोगों का प्ररूपण, १४०८-१४०९ ३०. चतुर्विध देवनिकायों में मनोहर अमनोहरता के कारणों का प्ररूपण, १४०९-१४१० ३१. देवों की स्पृहा का प्ररूपण, १४१० ३२. देवों के परितप्त होने के कारणों का प्ररूपण, १४१० ३३. देव के च्यवनज्ञान और उद्वेग के कारणों का प्ररूपण, १४१० ३४. देवों के अब्भ्युत्थानादि के कारणों का प्ररूपण, १४१०-१४११ ३५. देव सन्निपातादि के कारणों का प्ररूपण, १४११ ३६. देवों द्वारा विद्युत् प्रकाश और स्तनित शब्द के करने के हेतु का प्ररूपण, १४११ ३७. देवों द्वारा वृष्टि करने की विधि और कारणों का प्ररूपण, १४११-१४१२ (३३)
SR No.090159
Book TitleDravyanuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1995
Total Pages806
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size29 MB
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