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________________ सूत्र विषय पृष्ठांक | सूत्र विषय पृष्ठांक ६१. देवाधिदेवों का उपपात, १४९७ ६२. भावदेवों का उपपात १४९७ ६३. भव्यद्रव्य देवों का उद्वर्तन, १४९८ ६४. नरदेवों का उद्वर्तन, १४९८ ६५. धर्मदेवों का उद्वर्तन, १४९८-१४९९ ६६. देवाधिदेवों का उद्वर्तन, १४९९ ६७. भावदेवों का उद्वर्तन, १४९९ ६८. असंयत भव्यद्रव्य देव आदिकों का विविध देवलोकों में उत्पाद का प्ररूपण, १४९९-१५०० ६९. किल्विषिक देवों में उत्पत्ति के कारणों का प्ररूपण, १५०० ७०. उत्तरकुरु के मनुष्यों के उत्पात का प्ररूपण, १५००-१५०१ ७१. महर्द्धिक देव की नाग, मणी, वृक्ष के रूप में उत्पत्ति और तदन्तर भवों से सिद्धत्व का प्ररूपण, १५०१ ७२. समवहत पृथ्वी अप्-वायुकायिक उत्पत्ति के पूर्व और पश्चात् पुद्गल ग्रहण का प्ररूपण, १५०१-१५०४ ७३. एकत्व-बहुत्व की विवक्षा से चौबीसदंड़कों में अनन्त बार पूर्वोत्पन्नत्व का प्ररूपण, १५०४-१५०६ ७४. एकत्व-बहुत्व की विवक्षा से सब जीवों का मातादि के रूप में अनन्त बार पूर्वोत्पन्नत्व का प्ररूपण, १५०६ ७५. द्वीपसमुद्रों में सर्वजीवों के पूर्वोपन्नत्व का प्ररूपण १५०६-१५०७ ७६. नरक पृथ्वियों में सर्वजीवों का पृथ्वी कायिकत्वादि के पूर्वोत्पन्नत्व का प्ररूपण, १५०७ ७७. वैमानिक देवों में जीवों का अनन्त बार पूर्वोत्पन्नत्व का प्ररूपण, १५०७ ७८. वायुकाय का अनन्त बार वायुकाय के । रूप में उत्पाद-उद्वर्तन का प्ररूपण, १५०७-१५०८ ७९. शीलादिरहित तिर्यञ्चयोनिकों की कदाचित् नरक में उत्पत्ति का प्ररूपण, १५०८ ८०. दुःशील-सुशील मनुष्यों की उत्पत्ति का प्ररूपण, १५०८-१५०९ ८१. चार प्रकार के प्रवेशनक, १५०९ ८२. नैरयिक प्रवेशमक के भेदों का प्ररूपण, १५०९ ८३. सात नरक पृथ्वियों की अपेक्षा विस्तार से नैरयिक प्रवेशनक में प्रवेश करने वालों के भंगों का प्ररूपण, १५०९ ८४. दो नैरयिकों की विवक्षा, १५१० ८५. तीन नैरयिकों की विवक्षा, १५१०-१५१२ ८६. चार नैरयिकों की विवक्षा, १५१३-१५१६ ८७. पाँच नैरयिकों की विवक्षा, १५१६-१५२० ८८. छह नैरयिकों की विपक्षा, १५२०-१५२१ ८९. सात नैरयिकों की विवक्षा, १५२१-१५२२ ९०. आठ नैरयिकों की विवक्षा, १५२२ ९१. नौ नैरयिकों की विवक्षा, १५२२-१५२३ ९२. दस नैरयिकों की विवक्षा, १५२३ ९३. संख्यात नैरयिकों की विवक्षा, १५२३-१५२५ ९४. असंख्यात नैरयिकों की विवक्षा से, १५२५-१५२६ ९५. उत्कृष्ट नैरयिकों की विवक्षा से, १५२६-१५२७ ९६. नैरयिक प्रवेशनक का अल्पबहुत्व, १५२७-१५२८ ९७. तिर्यञ्चयोनिक प्रवेशनक का प्ररूपण, १५२८ ९८. तिर्यञ्चयोनिक प्रवेशनक का अल्पबहुत्व, १५२८-१५२९ ९९. मनुष्य प्रवेशनक का प्ररूपण, १५२९-१५३० १००. मनुष्य प्रवेशनक का अल्पबहुत्व, १५३० १०१. देव प्रवेशनक का प्ररूपण, १५३०-१५३१ १०२. भवनवासी आदि देव प्रवेशनक का अल्पबहुत्व, १५३१ १०३. नैरयिक-तिर्यञ्चयोनिक-मनुष्य-देव-प्रवेशनकों का अल्पबहुत्व, १५३१ १०४. चौबीसदंडकों में सत् के उत्पाद-उद्वर्तन का प्ररूपण, १५३१-१५३२ १०५. भगवान की स्वतः-परतः जानने का प्ररूपण, १५३३ १०६. चौबीसदंडकों में स्वयं उत्पन्न होने का प्ररूपण, १५३४-१५३५ . परिशिष्ट १ से ८ ( ३६ )
SR No.090159
Book TitleDravyanuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1995
Total Pages806
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size29 MB
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