SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 319
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ १०५८ १२. बेइंदिय-नपुंसगा विसेसाहिया, १३. ते उक्काइय- एगिंदिय-तिरिक्खजोणिय-नपुंसगा असंखेज्जगुणा, १४. पुढविकाइय-नपुंसगा विसेसाहिया, १५. आउक्वाइय-नपुंसगा विसेसाहिया, १६. वाउक्काइय-नपुंसगा विसेसाहिया, १७. वणस्सइकाइय-एगिंदिय - तिरिक्खजोणिय - नपुंसगा अनंतगुणा । प. (७) एयासि णं भंते ! मणुस्सित्थीणं-कम्मभूमियाणं, अकम्मभूमियाणं, अंतरदीवियाणं, मणुस्सपुरिसाणंकम्मभूमगाणं, अकम्मभूमगाणं, अंतरदीवगाणं, मणुस्सनपुंसगाणं, कम्मभूमगाणं, अकम्मभूमगाणं, अंतरदीवगाण य कयरे कयरेहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहियावा ? उ. गोयमा ! १-२ अंतरदीवगा मणुस्सित्थियाओ • मणुस्सपुरिसा य एए णं दोण्णि वि तुल्ला सव्वत्थोवा, ३-६. देवकुरु-उत्तरकुरु-अकम्मभूमिगं - मणुस्सित्थियाओ मणुस्सपुरिसा एए णं दोण्णि वि तुल्ला संखेज्जगुणा, ७- १०. हरिवास-रम्मंगवास - अकम्मभूमिग- मणुस्सित्थियाओ मणुस्सपुरिसा य एएणं दोणि वितुल्ला संखेज्जगुणा, ११-१४. हेमवए- हेरण्णवए-अकम्मभूमिग- मणुस्सित्थि - याओ मणुस्सपुरिसा य दोण्णि वि तुल्ला संखेज्जगुणा, १५-१६. भरहेरवय-कम्मभूमग मणुस्स-पुरिसा दोवि संखेज्जगुणा, १७-१८. भरहेरवय-कम्मभूमग मणुस्सित्थियाओ दोवि संखेज्जगुणाओ, १९-२०.पुव्वविदेह-अवरविदेह-कम्मभूमग-मणुस्सपुरिसा दोवि संखेज्जगुणा, २१-२२. पुव्वविदेह - अवरविदेह-कम्मभूमिगमस्सित्थियाओ दोवि संखेज्जगुणाओ, २३. अंतरदीवग- मणुस्स-नपुंसगा असंखेज्जगुणा, २४-२५. देवकुरु-उत्तरकुरु-अकम्मभूमग-मणुस्सनपुसंगा दोवि संखेज्जगुणा । २६-२७. हरिवास-रम्मगवास-अकम्मभूमग मणुस्सनपुंसगा दोवि संखेज्जगुणा, २८-२९. हेमवय-हेरण्णवय- अकम्मभूमग-मणुस्सनपुंसगा दोवि संखेज्जगुणा, ३०-३१. भरहेरवय-कम्मभूमग मणुस्स-नपुंसगा दोवि संखेज्जगुणा द्रव्यानुयोग - (२) १२. ( उनसे) द्वीन्द्रिय तिर्यग्योनिक-नपुंसक विशेषाधिक हैं, १३.(उनसे) तेजस्कायिक एकेन्द्रिय तिर्यग्योनिक - नपुंसक असंख्यातगुणे हैं, १४. (उनसे) पृथ्वीकायिक (एकेन्द्रिय तिर्यग्योनिक) नपुंसक विशेषाधिक हैं, १५. (उनसे अपकायिक (एकेन्द्रिय तिर्यग्योनिक )- नपुंसक विशेषाधिक हैं, १६. (उनसे) वायुकायिक (एकेन्द्रिय तिर्यग्योनिक )- नपुंसक विशेषाधिक हैं, १७. (उनसे) वनस्पतिकायिक एकेन्द्रिय तिर्यग्योनिक-नपुंसक अनन्तगुणे हैं, प्र. ( ७ ) भंते ! कर्मभूमिक-अकर्मभूमिक अन्तद्वपज मनुष्यस्त्रियाँ कर्मभूमिक-अकर्मभूमिक अन्तद्वपज मनुष्य-पुरुषों, कर्मभूमि अकर्मभूमिक अन्तद्वीपज मनुष्य-नपुंसकों में कौन किनसे अल्प यावत् विशेषाधिक हैं ? उ. गौतम ! १-२ . अन्तर्दीपज मनुष्य-स्त्रियां और मनुष्य-पुरुष ये दोनों परस्पर तुल्य हैं और सबसे अल्प हैं, ३-६. (उनसे) देवकुरु- उत्तरकुरु अकर्मभूमिक मनुष्यस्त्रियां और मनुष्य - पुरुष ये दोनों परस्पर तुल्य हैं और संख्यातगुणे हैं, ७-१० (उनसे) हरिवर्ष- रम्यकवर्ष अकर्मभूमिक मनुष्य-स्त्रियां और मनुष्य-पुरुष ये दोनों परस्पर तुल्य हैं और संख्यातगुणे हैं, ११-१४ ( उनसे) हैमवत हैरण्यवत अकर्मभूमिक मनुष्यस्त्रियां और मनुष्य-पुरुष ये दोनों परस्पर तुल्य हैं और संख्यातगुणे हैं, १५-१६ ( उनसे) भरत - ऐरवत कर्मभूमिक मनुष्य-पुरुष दोनों संख्यातगुण हैं, १७-१८ ( उनसे) भरत - ऐरवत कर्मभूमिक मनुष्य-स्त्रियां दोनों संख्यातगुणी हैं, १९-२० (उनसे) पूर्वविदेह - अपरविदेह कर्मभूमिक मनुष्यपुरुष दोनों संख्यातगुणे हैं,. २१-२२ (उनसे) पूर्वविदेह- अपरविदेह कर्मभूमिक मनुष्यस्त्रियां दोनों संख्यातगुणी हैं, २३. (उनसे) अन्तद्वपज मनुष्य नपुंसक असंख्यातगुणे हैं, २४-२५ (उनसे) देवकुरु- उत्तरकुरु अकर्मभूमिक मनुष्य नपुंसक दोनों संख्यातगुणे हैं, अकर्मभूमिक २८-२९ (उनसे) हैमवत-हैरण्यवत अकर्मभूमिक मनुष्य नपुंसक दोनों संख्यातगुणे हैं, ३०-३१ (उनसे) भरत-ऐरवत कर्मभूमिक मनुष्य नपुंसक दोनों संख्यातगुणे हैं, २६-२७ ( उनसे) हरिवर्ष - रम्यकवर्ष मनुष्य नपुंसक दोनों संख्यातगुणे हैं,
SR No.090159
Book TitleDravyanuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1995
Total Pages806
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size29 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy