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________________ २२२ ] दि. जैन व्रतोद्यापन संग्रह । रोहित हिमवद्जातां जिनबिंबसमन्वितां । सलिला०॥ ___ॐ ह्रीं जिनबिम्बसमन्वितरोहितायै जला० ॥३॥ महाहिमदुद्भतां रोहितास्यां जिनान्वितां । सलिला०॥ ॐ ह्रीं जिनबिम्बसमन्वितरोहितास्यायै जला० ॥४॥ महाहिमदुद्भतां हरितां जिनसंयुक्तां । सलिला०॥ ॐ ह्रीं जिनबिम्बसमन्वितहरिते जला० ॥५॥ निषधाचलसंभतां हरिकांता जिनाकितां । सलिला०॥ ॐ ह्रीं जिनबिम्बसमन्वितहरिकांतायै जला० । ६।। निषधाचलसंभा सीतां श्रीजिनसंश्रितां । सलिला० ॥ ॐ ह्रीं जिनबिम्बसमन्वितसीतानी जला० ॥७॥ नीलभभत्समुत्पन्नां सीतोदां प्रतिमान्विता । सलिला०॥ ॐ ह्रीं जिनबिम्बसमन्वितसीतोदानी जला० ।।८।। नीलभभृत्समुत्पन्नां नारी प्रतिममांकितां । सलिला०|| ॐ ह्रीं जिनबिम्बसमन्वितनारीना जला० ॥९॥ रुक्म्यद्रिप्रोत्थितां रम्यां नरकांतां जिनान्विता । सलि०॥ ॐ ह्रीं जिनबिम्बसमन्वितनरकान्तानद्य जला० ॥१०॥ रुक्मिपर्वतसंभूतां सुवर्णकुलसंज्ञिका । सलिला० ।। ॐ ह्रीं जिनबिम्बसमन्वितसुवर्णकुलाना जला० ॥११॥ शिखरिप्रोत्थितां रम्यां रौप्यकुलां जिनांकितां ।सलिला.। ॐ ह्रीं जिनबिम्बसमन्वित रौप्यकुलानो जला० ॥१२॥ शिखरिप्रोत्थितां रक्तां श्रीजिनप्रतिमांकितां । सलिला०॥ ॐ ह्रीं जिनबिम्बसमन्वितरक्तानो जला० ॥१३॥
SR No.090154
Book TitleDigambar Jain Vratoddyapan Sangrah
Original Sutra AuthorN/A
AuthorFulchand Surchand Doshi
PublisherDigambar Jain Pustakalay
Publication Year1986
Total Pages408
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, & Ritual
File Size20 MB
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