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________________ ५२ विषय परमें दुःख-सुख से पाप-पुण्यके एकान्तकी सदोषता स्वमें दुःख-सुखसे पुण्य-पाप के एकान्तकी सदोषता उक्त उभय तथा अवक्तव्य एकान्तों की सदोषता पुण्य-पापकी निर्दोष व्यवस्था अज्ञानसे बन्धका और अल्प देवागम पृष्ठ ९१ ९५ ९६ ९७ ज्ञानसे मोक्षका एकान्त उक्त उभय और अवक्तव्य एकान्तों की सदोषता अज्ञान अल्पज्ञानसे बन्ध-मोक्षकी निर्दोष-विधि कर्मबन्धानुसार संसार विविधरूप और बद्ध जीव शुद्धि - अशुद्धिके भेदसे दो भेदरूप शुद्धि - अशुद्धि दो शक्तियोंक सादि-अनादि व्यक्ति प्रमाणका लक्षण और उसके भेद प्रमाणों का फल स्यात् निपातकी अर्थ-व्यवस्था १०४ 33 १०० १०१ " "" १०२ १०३ विषय स्याद्वादका स्वरूप स्याद्वाद और केवलज्ञानमें भेद-निर्देश नय-हेतुका लक्षण द्रव्यका स्वरूप और भेदोंकी सूचना निरपेक्ष और सापेक्ष नयोंकी स्थिति वस्तुको विधि-वाक्यादि-द्वारा नियमित किया जाता है वाक्य अवस्तु अभिप्रेत विशेष की प्राप्तिका पृष्ठ १०५ सच्चा साधन स्याद्वाद-संस्थिति आप्त-मीमांसाका उद्देश्य अनुवादकीय - अन्त्य - मंगल १०६ " १०७ १०८ तदतद्रूप वस्तुको तद्रूप ही कहनेवाली वाणी सत्य नहीं १०९ वाक्-स्वभाव-निर्देश, तद्भिन्न "" ११० १११ ११३ ११४ ""
SR No.090131
Book TitleDevagam Aparnam Aaptmimansa
Original Sutra AuthorSamantbhadracharya
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1967
Total Pages196
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, P000, & P015
File Size12 MB
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