SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 16
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ १४ छहढाला प्रश्न ३ – खाने को क्या मिलता है ? उत्तर – एक कण भी अनाज वहाँ खाने को नहीं मिलता है । प्रश्न ४ – सागर किसे कहते हैं ? उत्तर - दो हजार कोस गहरे और दो हजार कोस चौड़े गोल गड्ढे में कैंची से जिसका दूसरा भाग न हो सके, ऐसे एक से लेकर सात दिन तक के पैदा हुए उत्तम भोगभूमि के मेढे के बालों को पूर्ण भरना, उनमें से एक बाल को सौ-सौ वर्ष बाद निकालना । जितने दानवें उतने काल को व्यवहार पल्य कहते हैं। व्यवहार पल्य से असंख्यात गुणा उद्धारपल्य और उद्धारपल्य से असंख्यात गुणा अद्धापल्य होता है । ऐसे १० कोड़ा कोड़ी (१० x १० करोड़) अद्धापल्यों का एक सागर होता है ! प्रश्न ५ - मनुष्य गति में उत्पत्ति का कारण क्या है ? उत्तर---"करम जोगतें नरगति लहैं” पुण्य योग से लेश्या या कषाय की मन्दता से मनुष्य गति मिलती है । प्रश्न ६ - मनुष्य गत्ति किसे कहते हैं ? उत्तर – मनुष्य गति नामकर्म के उदय से मनुष्यों में जन्म लेना या पैदा होने को मनुष्य गति कहते हैं । प्रश्न ७ – मनुष्य कहाँ रहते हैं ? उत्तर -- मनुष्य मध्य लोक में रहते हैं । मनुष्य गति के दुःख जननी उदर वस्यो नव मास, अंग सकुचतें पाई त्रास । माता । उदर = पेट । नव मास = नौ महीने । निकसत जे दुख पाये घोर, तिनको कहत न आवे ओर ।। १४ । । शब्दार्थ — जननी चस्यो रहा | अंग = शरीर । सकुचतें = सिकुड़ा रहने से । त्रास दुःख । निकसन = पैदा होते समय । घोर = भयानकं । ओर = अंत | अर्थ - यह जीव माता के पेट में नौ माह रहा । वहाँ अंग सिकुड़ा रहने से जो दुःख उठाया तथा जन्म लेते समय जो भयानक दुःख भोगे, उनको कहते हुए अन्त नहीं आ सकता । = 1
SR No.090123
Book TitleChahdhala 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDaulatram Kasliwal
PublisherBharat Varshiya Anekant Vidwat Parishad
Publication Year
Total Pages118
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Religion
File Size2 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy