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________________ त्र ६०७-६०८ afe मउगा मेहुणवडियाए अण्णमरणस्स दोहाई बस्थि-रोमाई पेज वा मा. कतं वा संठवतं वा साइज । मि -बाई कपेज वा संवेज्ज बा. कप्पेतं वा संठतं वा साइज्ड । तं सेवमाने भवन बाउम्मासि परिहारद्वार्ण अधाइयं - नि. उ. ७, सु. ४०-४४ मेहुणवडियाए अण्णमण्ण ओट्ट परिकम्मस्स पायति सुत्ताई ६०८. जे भिक्खू मडागामस्त मेहुणवडियाए अग्ममण्णस्स पट्ट े माम्यामरस मेहरावडियार अम्मयस्त दोहाई आमज्जेज्ज या पमन्जेज्ज वा मंयुन सेवन के संकल्प से ओष्ठ परिकर्म के प्रायश्वित्त सूत्र चारित्राबार ४०६ आमन्तं वा पमनंतं वा साइज्जइ । जेमिन माग्गामस्त मेहूणवडियाए अपनमण्णस्स उट्ट े - - बाबा परिवा संबा या पलिमद्दतं वा साइड जे मिक्सू माजग्गामस्त मेहणवडियाए अन्नमरणस्स उट्ठ हेलेन राजा-नोएन मा. भक्वेक्स मा, मिलिगेज वा. मस्तं वा मिलितं वा साइकजइ । माभ्यामास मेहुणवडियाए अन्यमन्यस्स उट्ठ े लोग वा जाव णेण वा मोलेका उम्ब www.www. जो माता के समान है इन्द्रियों की ऐसी स्त्री से) मैथुन सेवन का संकल्प करके एक दूसरे के वस्ति के लम्बे रोमों को www सुशोभित करे, कटवावे सुशोभित करवावे. काटने वाले का, सुशोभित करने वाले का अनुमोदन करे । जो भिक्षु माता के समान हैं इन्द्रियाँ जिसकी (ऐसी स्त्री से) मैथुन सेवन का संकल्प करके एक दूसरे के चक्षु के लम्बे रोमों को काटे, सुशोभित करे कटवावेोभित करवावे, काटने का सुशोभित करने वाले का अनुमोदन करे। उसे चातुर्मासिक अनुद्घातिक परिहारस्थान ( प्रायश्चित्त जाता है । मैथुन सेवन के संकल्प से बोष्ठ परिकर्म के प्रायश्वित) सूत्र ६०० ये मि माता के समान हैं इन्द्रियों कि ऐसी स्पी सेवन का संकल्प करके एक दूसरे के होठों का मार्जन करे, प्रमार्जन करें, भाजन करवावे, प्रमार्जन करवाये, मार्जन करने वाले का, प्रमार्जन करने वाले का अनुमोदन करे । जो भिक्षु माता के समान हैं इन्द्रियाँ जिसकी (ऐसी स्त्री से) मधून सेवन का करके एक दूसरे के होठों को मर्दन करे, प्रमर्दन करें, मन करावे, प्रमदेन करवाने, मर्दन करने वाले का, प्रमदेन करने वाले का अनुमोदन करे । जो भिक्षु माता के समान हैं इन्द्रियाँ जिसकी (ऐसी स्त्री से) मैथुन सेवन का संकल्प करके एक दूसरे के होठों पर -- तेल- पावत् — मक्खन, मले, बार-बार मले, मलवावे, बार-बार मलवावे, मलने वाले का बार-बार मसने वाले का अनुमोदन करे 1 जो भिक्षु बाता के समान है इन्द्रियाँ जिसकी ऐसी की से) मैथुन सेवन का संकल्प करके एक दूसरे के होठों पर लोध - यावत्-वर्ण का, उबटन करे, बार-बार उबटन करे, उबटन करवावे, बारम्बार उबटन करवावे,
SR No.090119
Book TitleCharananuyoga Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year
Total Pages782
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Conduct, Agam, Canon, H000, H010, & agam_related_other_literature
File Size23 MB
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