SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 49
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ५४ श्री भक्तामर महामण्डल पूजा सर्वरोग प्रतिरोधक नास्तं कदाचिदुपयासि न राहुगम्यः, स्पष्टीकरोषि सहसा युगपज्जगन्ति । नाम्भोधरोवर -- निरुद्ध -- महाप्रभावः, सूर्यातिशायिमहिमासि मनीद्र ! लोके ।।१७।। शुभरवीव जिनः जिननायकः, दुरितरात्रिघनान्ध---तमोपहः । स्वजनपद्मविकाश-विधायकः, स्तवनपूजनश्च यामि तम् ।। मस्त न होता कभी न जिसको, अस पाता है राह प्रबल । एक साय बतलाने वाला, तीन लोक का ज्ञान विमल ॥ सकता कभी प्रभाव न जिसका, बादल की प्राकर के प्रोट । ऐसी गौरव-गरिमा बाले, आप अपूर्व दिवाकर कोट ॥१७॥ ( ऋद्धि ) ॐ ह्री अर्ह णभो अट्ठा महानिमित्कुमलाणं । ( मंत्र ) ॐ एमो मिऊए मट्ठ म? सदविघट्ट मुदपीड़ा अठरपीड़ा भंजय २, सर्वपीडा: निवारण २, सवंरोग-निवारणं कुरु कुरु स्वाहा । (विषि) प्रवासहित ७ दिन तक ... जाप जपना चाहिये। मछूता पानी २१ वार मंत्रित कर पिलाने से शारीरिक सभी रोग दूर हो जाते हैं ॥१७॥ प्रवं-हे मुनिमाय ! मापकी महिमा सूर्य से भी अधिक है। क्योंकि सूर्य सन्ध्या समय मस्त हो जाता है, परन्तु पाप सवा प्रकाशित
SR No.090095
Book TitleBhaktamara Mahamandal Pooja
Original Sutra AuthorSomsen Acharya
AuthorMohanlal Shastri
PublisherBharat Varshiya Anekant Vidwat Parishad
Publication Year
Total Pages107
LanguageHindi, English
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, & Ritual
File Size1 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy