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________________ जैन समाज का राजनैतिक भाग श्री एस० पी० मोदी भूतपूर्व गवर्नर, उ० प्र० जैन समाज ने देश के राजनैतिक तथा आत्मिक जीवन में विशेष भाग लिया है। -बीर देहली १५-१-५१ प्र०४ विश्व कल्याण के नेता शेरे पंजाब लाला लाजपतराय भगवान महावीर समस्त प्राणियों का कल्याण करने वाले महापुरुष हए हैं। जैन संसार मार्च, सन् १९३७, पृ० ५. महा उपकारी और त्यागी श्री राजा महाराजसिंह गवर्नर बम्बई प्राशा है भगवान महावीर की सेवा और त्याग की भावना का प्रसार होगा। -बीर देहली १५-१-५२ पृ० ४३ धीर उपवेश को प्रावश्यकता श्री जपरामदास दौलतराम जो गवर्नर आसाम जिन सिद्धान्तों के लिये भगवान् महावीर ने जो उपदेश दिया उनकी आज के मानव समाज के लिये परम पावश्यकता है। -वीर देहली १५-१-५१, पृ० ४ मानव जाति का सच्चा सुख श्री मंगलदास जी गवर्नर उड़ीसा इस समय सारे संसार को अहिंसा धर्म के प्रचार का बड़ा आवश्यकता है जो राष्ट्रीय संहार के शास्त्रों से सुसज्जित है। यदि ग्राज सत्य और अहिंसा को अपना ले, तो मानव जाति सच्चा सुख प्राप्त कर सकती है। -भगवान महावीर स्मृति ग्रन्थ, आगरा पृ० २८१. भगवान् महाबीर का प्रभाव श्री लालबहादुर शास्त्री मन्त्री भारत सरकार रिश्वत, बेईमानी अत्याचार अवश्य नष्ट हो जावे यदि हम भगवान् महावीर की सुन्दर और प्रभावशाली शिक्षाओं का पालन करें । बजाय इसके कि हम दूसरा का बुरा कह और उनमें दोष निकाल । अगर भगवान् महावीर के समान हम सब अपने दोषों और कमजोरियों को दूर कर ली तो सारा संसार खुद-ब-खुद सुधर जाये । -वर्द्धमान देहली, अप्रैल १९५३, पृ० ५६ मुक्ति का सबसे महान ध्येय हिज हाइनेस महाराज साहब सिधियां राज-प्रमुख मध्य भारत जैन धर्म में जीवन की सार्थकता का सबसे महान् ध्येय निर्वाण तथा मुक्ति को ही मानते हैं। जिनके प्राप्त करने से सांसारिक बचनों, लौकिक भावनामों तथा जीवन के आवागमन से मोक्ष मिल जाता है। -जैन गजट देहली ४-५२-५१ जैन धर्म व्यवहारिक, प्रास्तिक तथा स्वतंत्र है श्रीयुत सक्षमण रघुनाथ भिडे अन्य धमों के विद्वानों ने प्राज्ञानता और ईया होने के कारण टीकायों द्वारा भारत वर्ष में जैन धर्म के अनुसार अज्ञानता फैला दी है हालांकि जैन धर्म पूर्ण रूप से व्यवहारिक और मास्तिक तथा स्वतंत्र धर्म है। -भ० महावीर का अादर्श जीवन, पृ. ३६. संसार के कल्याण का मार्ग जैन धर्म माननीय श्री गोविन्दबल्लभ पन्त जैनियों ने लोक सेवा की भावना से भारत में अपना एक अच्छा स्थान बना लिया है। उनके द्वारा देश में कला और १२६
SR No.090094
Book TitleBhagavana Mahavira aur unka Tattvadarshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDeshbhushan Aacharya
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1014
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, Principle, & Sermon
File Size36 MB
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