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________________ विस्तार रा. बा. 1३। नाम ति.प. |४|गा. ह. पु. | त्रि. सा. ।गा. गा. अ. प. अ.गा मेरु के पूर्व या मेरु के उत्तर | उत्तर दक्षिण पश्चिम में . या दक्षिण में| | कुल विस्तार यो. यो. यो. भद्रशाल | २२००० | २५० | विदेह क्षेत्रवत् २००२ १७८३ : ३६१०+ | ४१४३ ६१२ पवल व्यास बाह्य व्यास अभ्यन्तर व्यास | ---- यो. यो. १९५४६ . ८६५४६६ ११८६ १७६७ ४२७२६२ । ३२७२६६ १६३८+ १६८६ | १८०।१ । २६६ ! १८१०+१८१४ | १८०।१२ | ३०० | नन्दनवन २६० सौमनसवन | ४८२ " | ४११२७ , । ४।१३१ पाण्डक वन ००० पांचवीं पृथ्वी के तम नामक प्रथम इन्द्रक में स्थित जीवों के शरीर की ऊंचाई पचहत्तर धनुष प्रमाण है। तम प. में ध. ७५ । पांचवीं पृथ्वी के भ्रम नामक पटल में नारकी जीवों के शरीर का उत्सेध सतासी धनुष और दो हाथ प्रमाण है। भ्रम प, में घ. मष नामक पटल में एक सौ धनुष, तथा अंधक पटल में एक सौ बारह धनुष और दो हाच प्रमाण नारकियों के शरीर की ऊंचाई है। झष प. में ध. १०० । अंधक प. में घ. ११२, ह. २। धूमप्रभा पृथ्वी के तिमिथ नामक अन्तिम इन्द्रक में नारकियों के शरीर का जत्नेध पच्चीस अधिक एक सौ अर्थात् एक मौ पच्चीस धनुषमात्र है । तिमिश्न प. में घ. १२५। छठी पृथ्वी में हानि-वृद्धि का प्रमाण इकतालीष धनुष, दो हाथ और सोलह संगुल है। ध. ४१, इ. २, अं.१६ हा.. । हिम पटलगत जीवों के शरीर की ऊंचाई एक सौ छयासठ धनुष, दो हाय और सोलह अंगुन प्रमाण है । हिम प. में दं. १६६, ह. २, अं. १६ । छी पृथ्वी के बर्दल पटल में स्थित जीवों के शरीर का उत्सेध दो सौ आठ धनुय और वत्तीस अंगुल प्रमाण है । बर्दन प. में दं. २०८, बं. ३२ (१ ह. अं.)। लल्लक मामक इन्द्रक में स्थित जीवों के दारीर का उत्सेध दो सौ पचास धनुषमात्र है। लल्लक प, में द. २५० । सातवी पृथ्वी के अवधिस्थान इन्द्रक में पांच सौ धनुष प्रमाण नारकियों के शरीर का उत्सेय है। इस प्रकार जिन भगवान् ने नारकियों के शरीर का उत्सेध कहा है। अवधिस्थान, प. में द, ५०० । इस प्रकार रलप्रमादिक पृथ्वियों के प्रत्येक इन्द्रकों में जो शरीर का उत्सेध है, वही उत्सेध उन पृश्वियों के श्रेणी बद्ध और विश्रेणीगत प्रकीर्णक विल्लों में भी जानना चाहिये । इस प्रकार नारकियों के शरीर का उत्सेध प्रमाण समाप्त हुआ। रत्नप्रभा पृथ्वी में अवधिज्ञान का क्षेत्र चार कोस मात्र है । इसके आगे प्रत्येक पृथ्वी में उक्त अवधि-क्षेत्र में से प्रधं गब्युतिकी कमी होती चली गई है।
SR No.090094
Book TitleBhagavana Mahavira aur unka Tattvadarshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDeshbhushan Aacharya
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1014
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, Principle, & Sermon
File Size36 MB
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