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________________ १२ कुण्डलवर पर्वत के कटों व देवों के नाम-- दृष्टि सं०१-(ति. प. १५२१२२-१२५), (त्रि.सा. १९४४-१४५), दृष्टि सं० २-(तिखप. ।५।१३३), (रा. वा. ।३।३५-१६४१७) (ह.पु. । ५।६६०-६६२) दिशा । कूट दिशा कट | दृष्टि सं. १, दृष्टि सं.२ । __ दृष्टि सं.१ दृष्टि सं०२ पुर्व । वन विशिष्ट (त्रिशिरा) । पश्चिम अंक स्थिरहृय अंकप्रभ वज्रप्रभ पंचशिर मणि महाहृदय श्री वृक्ष स्वास्तिक कनक महाशिर সম্বিস कनकप्रभ । महाबाहू दक्षिण । रजत स्व स्व कूट सदृश नाम पप उत्तर स्व स्व कूट सदृश नाम स्चक सुन्दर पद्मोत्तर रतप्रभ (रजताभ) रुचकाभ विशालनेत्र सुप्रभ महापद्म हिमवान पाण्डुक महाप्रभ वासुकी मन्दर पाण्डुर नोट:-रा. बा. ब.है. पू. में उत्तर दिशा के कूटों का नाम क्रम से स्फटिक, स्फटिकप्रभ, हिमवान् व महेन्द्र बताया है। अन्तिम दो देवों के नामों में पाण्डुक के स्थान पर पाण्डुर और पापडर के स्थान पर पाण्डक बताया है। तीसरी पथ्वी में तपन नामक तृतीय इन्द्रक का विस्तार इश्वीस लाख सोलह हजार छह सौ छयासठ योजन और योजन के तीन भागों में दो भाग प्रमाण है। २२०५३३३१-११६६६-२११६६६४। तीसरी पश्विी में नापन नामक चतुर्थ इन्द्रक का विस्तार बीस लाख पच्चीस हजार योजन प्रमाण है। २११६६६६-११६६६३-२०२५०००। तृतीय वसुधा में (निदाष नामक पंचम इन्द्रक का) विस्तार उन्नीस लाख तेलीस हजार तीन सौ तेतीस योजन और योजन के ततीय भाग प्रमाण है। २०२५०००-६१६६६१-१९३३३३३४।। तीसरी पृथ्वी में प्रज्वलित नामक छरे इन्द्रक का विस्तार अठारह लाख इकतालीस हजार छह सौ छयासठ योजन और एक पोजन के तीन भागों में से दो भाग प्रमाण है। १६३३३३३-११६६६३१४१६६६। तृतीय वमुचा में उज्वलित नामक सातवे इन्द्रक का विस्तार सत्तरह लाख पत्रास हजार योजन प्रमाण है। १८४१६६६३-६१६६६-१७५०००० । तुतीय भुमि में संज्वलित नामक आठवें इन्द्रक का विस्तार सोलह लाख अठावन हजार तीन सौ तेतीस योजन और एक पोजन का तीसरा भाग है। १७५००००-११६६६ =१६५८३३३ । जीसरी पथियो में संप्रज्वलित नामक नववे इन्द्रक का विस्तार पन्द्रह लामा छिवासठ हजार छह सौ छयासठ योजन और एक बोजन के तीन भागों में दो भाग प्रमाण है। १६५८३३३३- ६१६६६३१५६६६६६३। चतुर्थ पथ्वी आन नामक प्रथम इन्द्रका के विस्तार का प्रमाण चौदह लाख पचत्तर रमार योजन है। १४७५०००-६१६६६११३८३३३३३। चतुर्थं पृथ्वी में मार नामक द्वितीय इन्द्रक का विस्तार तेरह लाज तेरासी हजार तीन सौ तेतीस योजन और एक गोजन के तीसरे भाग प्रमाण है। १४७५०००-११६६६१=१३८३३३३३ ।
SR No.090094
Book TitleBhagavana Mahavira aur unka Tattvadarshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDeshbhushan Aacharya
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1014
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, Principle, & Sermon
File Size36 MB
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