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________________ 558 559 560 561 562 563 565 568-593 568 568 570 मंगल के वक्रानुवक्रा का फल मंगल के वक्रगति द्वारा गमन और नक्षत्र घात का फल अपगति से गमन करने का फल वक्रगति से धनिष्ठादि ससात नक्षत्रों के भोग का फल क्रूर, क्रुद्ध और ब्रह्मघाती होकर मंगल के गमन का फल मंगल के वर्ण, कान्ति और स्पर्श का फल भौमका द्वादश राशियों में स्थित होने का फल नक्षत्रों के अनुसार मंगल का फल बीसवाँ अध्याय राहु-चार के कथन की प्रतिज्ञा राहु की प्रकृति, विकृति आदि के अनुसार फल प्राप्ति का काल चन्द्रमा की विकृति का फल राहु के आगमन के चिह्न और फल चन्द्रग्रहण के संकेत का कथन चन्द्रग्रहण लगने के चिह्न और पहिचान चन्द्रमा के परिवेष के अनुसार राहु का कथन चन्द्रमा द्वारा ग्रहण के रंग का वर्णन ग्रहण के आगम के चिह चन्द्रग्रहण के अन्य चिह्न चन्द्रमा की आभा का फल राशि तथा समय के अनुसार ग्रहण का फल चन्दग्रहण के दिन यात्रा का निषेध चन्द्रग्रहण का विभिन्न दृष्टियों से फल चन्द्रग्रहण के रंग द्वारा फल चन्द्रग्रहण सम्बन्धी अन्य शकुनों का वर्णन द्वादश राशियों के अनुसार राहु फल 571 572 575 576 577 578 580 580 581 582 582 584 586 587
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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