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________________ | १०५९ कर हस्त रेखा ज्ञान त्रिशूलमंकुशं चापि ललाटे यस्य धनिकं यते । विजानीयात् पराजीवल्लभः ॥ तं जिसके ललाट पर त्रिशूल या अंकुश का चिह्न दिखाई दे उसे धनी समझना चाहिये। वह स्त्री का प्राण प्यारा होता हैं । स्थूलशीर्बनरा वर्तुलाकारशीर्षेण ये च धनवंतः मनुजो चौड़े सिर वाले मनुष्य धनी और गोलाकार सिर वाले राजा होते हैं। रुक्षनिर्वाणि वर्णानि स्नेहस्थूला च मूर्द्धजा । निस्तेजाः सः सदा ज्ञेयः कुटिलकेशदुःखितः ॥ प्रकीर्तिताः । मानवाधिपः ॥ जिसके बाल रुखे विवर्ण हों तथा तेल आदि लगाने पर जकड़ कर स्थूल हो जाते हों वह पुरुष निस्तेज होता हैं। कुटिल अलकों वाला मनुष्य दुःखी होता है । अथ स्त्रीलक्षणम् प्रणम्य सर्वज्ञं परमानन्दं स्वामिनं जिनम् । सामुद्रिकं प्रवक्ष्यामि स्त्रीणामपि शुभाशुभम् ॥ परम आनन्द मय, सर्वज्ञ, श्री स्वामी जिनेश्वर को प्रणाम करके स्त्रियों के शुभाशुभ के बताने वाले सामुद्रिक शास्त्र को कहता हूँ । कीदृशीं बरयेत्कन्यां कीदृर्शी च विवर्जयेत् । किंचित्कुलस्य नारीणां लक्षणं वक्तु मर्हसि ॥ कैसी कन्या का वरण करना चाहिये, कैसी का त्याग करना चाहिये, कुलस्त्रियों का कुल लक्षण आप कह सकते हैं। कृषोदरी च विम्बोष्ठी दीर्घकेशी च या भवेत् । दीर्घमायुः समाप्नोति धनधान्यविवर्द्धिनो ॥ जो स्त्री कृशोदरी ( कमर की पतली ), बिंबफल के समान अधरों वाली और
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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