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________________ 767 780 781 782 801 802 803 806 809 'ॐही रक्ते रक्ते... ह्रीं स्वाहा' इस मन्त्र से अभिमन्त्रित होकर छायादर्शन का उल्लेख कूष्माण्डिनी देवी के जाप पूर्वक छाया को देखने का विधान छाया पुरुष के दर्शन द्वारा अरिष्ट का कथन स्वप्न फल का कथन दोषज, दृष्ट आदि आठ प्रकार के स्वप्नों का कथन सफल तथा निष्फल प्रश्न का निरूपण स्वप्न का गुरु के अतिरिक्त अन्य व्यक्ति के समक्ष प्रकाशित न करने का विधान अभिमन्त्रित तेल में मुख की छाया द्वारा अरिष्ट का विचार शब्दश्रवण द्वारा शुभाशुभ फल का कथन शकुन विचार भूमि पर सूर्य की छाया का दर्शन कर अरिष्ट के कथन का निरूपण रोगी के हाथ द्वारा रोगी के अरिष्ट का संकेत षोडशदल कमलचक्र द्वारा आयु परीक्षा अश्विनी आदि 27 नक्षत्रों में वस्त्रा धारण का फल कथन नूतन वस्त्र के कटने फटने छिद्र आदि के फल का निरूपण विवाह, राज्योत्सव आदि काल में वन धारण का शुभफल श्लोकानुक्रमणिका निमित्त शास्त्र 810 911 813 815 815 816 819 823-877 823 823 824 मंगलाचरण ग्रन्थ प्रतिज्ञा निमित्तों के भेद निमित्त के साधन आकाश प्रकरण मेघ के चिह्नों का फल चन्द्र प्रकरण उल्पात योग प्रकरण 825 825 830 833 833
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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