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________________ 634 635 635 636 636 636 636 637 638 चन्द्रमा के वर्ण का विचार चतुर्थी, पंचमी और पष्ठी तिथि में चन्द्रमा की विकृति का फल सप्तमी और अष्टमी को चन्द्र विकृति का फल नवमी ओर दशमी को होने वाली चन्द्रमा की विकृति का फल एकादशी और द्वादशी की चन्द्र विकृति का फल त्रयोदशी और चतुर्दशी को चन्द्रमा की विकृति का फल पूर्णिमा को चन्द्र विकृति का फल प्रतिपदादि तिथियों में चन्द्रमा में अन्य ग्रहों के प्रविष्ट होने का फल चन्द्रमा के विषर्यय होने का फल विवर्ण चन्द्रमा के विभिन्न बीथियों और नक्षत्रों में गमन करने का फल चन्द्रमा के वैश्वानर आदि मार्गों में विभिन्न प्रकार का फल विभिन्न नक्षत्रों में चन्द्रमा के घातित होने का फल सूर्यघात का फल केतुघात का फल क्षीण चन्द्रमा का फल चन्द्रमा के रूपवीथि, मार्ग, मंडल, आदि का कथन विभिन्न दृष्टियों से चन्द्रमा का फल द्वादश राशियों के अनुसार चन्द्र फल चौबीसवाँ अध्याय 640 642 645 647 647 649 649 651 653 655-669 655 656 656 ग्रहयुद्ध का वर्णन यायी संज्ञक ग्रह ग्रह युद्ध के साथ अन्य बातों का विचार यायी की परिभाषा जय-पराजय सूचक ग्रहों के स्वरूप चन्द्रघात और राहुघात का कथन शुक्रघात का कथन 656 657 658 658
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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