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________________ षड्विंशतितमोध्याय: 447 मृत्यु और स्वस्थ पुरुष रुग्ण होता है । यदि रवान में गत में गिर जाय और उट का प्रयत्न करने पर भी बाहर न आ मके तो उसकी दस दिन के भीतर मत्यु होती ___ गाड़ी-- गाय या बैलों के द्वारा खींची जाने वाली गाड़ी पर बैठे हुए देखने म पृथ्वी के नीचे रा चिर संचित धन की प्राप्ति होती है। वराहमिहिर के मत सेपीताम्बर धारण किय स्त्री को एक ही स्थान पर कई दिनों तक देखने ग उस स्थान पर धन मिलता है। बृहस्पति के मत से स्वप्न में दाहिने हाथ में सपा को काटता हुआ देखने से लक्ष रुपये की प्राप्ति अति पात्र होती है। ___ गाना -स्वयं को गाता हुवा देखने से याष्ट होता है । भद्रबाहू स्वामी के मत से स्वयं या दूसरे को मधुर गाना गाते हुए देखने में मृवादमा में विजय, व्यापार में लाभ और यण-प्राप्ति, बृहस्पति के मत से अर्थ-लाप गाथ भयानाः रोगों का शिकार और पारद के मत से सस्तान-कष्ट और अर्थ-लाभ एवं माकपडेय के मत मे अपार कष्ट होता है। गाय---"दुहने वाले व गाथ गाय को भवन म कौति और भय लाभ होता है। गणगति देवज के मत में--जल पीली गाय देखन में नमी 4 तुल्य गुण बाली कन्या का जन्म और वराहमिहिर के मन में---स्वप्न में गाय का दर्शन मात्र हो सन्तानोत्पादक है । गिरना- स्वरम में लड़यड़ाते हुए गिरना दखने म दुख, चिन्ता एवं मृत्यु. होती है। गृह--गृह में प्रवेश करना, ऊपर चढ़ना एवं किसी म प्राप्त करना देखने मे भूमि-लाभ और धन-धान्य की प्राप्ति एवं गृह का गिरना देखने में मृत्यु होती है। घास-कच्चा घास, यस्य (धान), कच्चे गहें एवं चन के पौधे दखने में भाई को गर्भ रहता है । परन्तु इनवा काटने या जाने से गर्भपात होता है। पत-~-घृत देखने से मन्दाग्नि, अन्य ग लेना दखन में यश-प्राप्ति, धृत-पान करना देखन म प्रमह और शरीर में लगाना देखने में मानसिक चिन्ताओं क साथ शारीरिक कष्ट होता है। घोटक घोड़ा देखने से अर्थ-लाभ, घोड़ा पर चढमा देवा स टुम्ब-वृद्धि और घोड़ी का प्रसव करना देखने से सन्तान-लाभ होता है । चक्षु- स्वप्न में अकस्मात् चक्षुद्वय का नष्ट होना देखने से. मृत्यु और आँख का फूट जाना देखने से कुटुम्ब में किसी की मृत्यु होती है।। घावर. स्वप्न में शरीर की चादर, चोगा या कमीज आदि यो अवत और लाल रंग को देखने में सन्तान-हानि होती है। चिता --अपने को चिता पर आरूढ़ देवने ने बीमार व्यक्ति की मृत्य होती हैं और स्वस्थ व्यक्ति बीमार होता है ।
SR No.090073
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 1
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages607
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size13 MB
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