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________________ 76 भद्रबाहुसंहिता अशिषिततोमराणा खा चर्मणाम् सदृशप्रतिलोमानि सङ्ग्रामं तेषु निविशेत् ॥14॥ तलवार, त्रिशूल, भाला, बर्फी, खड्ग, चक्र और ढाल के समान आकार वाले और प्रतिलोम - विपरीत मार्ग से गमन करने वाले बादल युद्ध की सूचना देते हैं ।14।। धनुषां कवचानां च बालानां सदृशानि च । खण्डान्यभ्राणि रूक्षाणि सग्रामं तेषु निर्दिशेत् ॥15॥ धनुषाकार, कवचाकार, बाल हाथी, घोड़ों की पूंछ के बालों के समान तथा खण्डित और रूक्ष वाद संग्राम की सूचना देते हैं || 1511 नानारूप प्रहरणं सर्वं यान्ति परस्परम् । ग्रामं तेषु जानीयादतुलं प्रत्युपस्थितम् ।।।6।। नाना प्रकार के रूप धारण कर सब बादल परस्पर में आधार - प्रतिघात करें तो घोर संग्राम की सूचना अवगत करनी चाहिए ||16| अभ्रवृक्षं समुच्छाद्य योऽनुलोमसमं व्रजेत् । यस्य राज्ञो वधस्तस्य भद्रबाहुवचो यथा ||17 जड़ से उखड़े हुए वृक्ष के समान यदि बादल गमन करते हुए दिखलाई पड़ें तो राजा के वध की सूचना ज्ञात करनी चाहिए, ऐसा भद्रवाह स्वामी का वचन है ।।17।। t 'बाला वृक्षमरणं कुमारामात्ययोर्वदेत् । एवमेवं च विलेयं प्रतिराजं यदा भवेत् ॥ 8 ॥ छोटे-छोटे वृक्ष के समान आकृति वाले बादलों से युवराज और मन्त्री का मरण जानना चाहिए ॥ 8 ।। तिर्यक्षु यानि गच्छन्ति क्षाणि च धनानि च । निवर्तयन्ति तान्याशु चमूं सर्वा सनायकाम् ॥५॥ यदि संघ तिर गमन करते हों, रूक्ष हों और सघन हों तो उनसे नायक | अप A. शिमरण ulua as C., zlaut 〃 5, नायकम् C " - 3.ffa ge C. 14. sala gA. D. D. 2. प्रतियां B.,
SR No.090073
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 1
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages607
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size13 MB
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