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________________ अनुक्रम आशीर्वचन : एलाचार्य मुनिश्री विद्यानन्दजी महाराज स्वस्ति-वाक : भट्टारक श्री चारुकीति स्वामी, श्रवणबेल्गोल प्रस्थापना : लेखकीय 1. मानव-सभ्यता के आदिकालीन चरण 1. कुलकरों की भोगभूमि से तीर्थंकर आदिनाथ की कर्मभूमि तक 2. भरत चक्रवर्ती का साम्राज्य-विस्तार 3. भरत सम्राट : एक अनासक्त योगी 2. पुरा-कथा की इतिहास-यात्रा : 'उत्तरापथात् दक्षिणापथम्' 27 1. चन्द्रगुप्त मौर्य का उदय 2. संस्कृति के शिलापट पर इतिहास की आत्मकथा 3. जैन संस्कृति की सार्वभौमिकता के संवाहक : आचार्य भद्रबाहु 3. धर्मचक्र की धुरी पर मूर्तिमती दिगम्बर साधना की इतिहास-यात्रा 53 1. आचार्य भद्रबाहु का धर्मचक्र और दिगम्बरत्व की विराटता के बिम्ब बाहुबली 2. श्रवणबेल्गोल में बाहुबली की मूर्ति-प्रतिष्ठापना 4. श्रवणबेल्गोल के शिलालेख : ध्वनि और प्रतिध्वनि 1. श्रवणबेल्गोल के शिलालेख : इतिहास और संस्कृति के संवाद स्वर 70 5. श्रवणबेल्गोल : तीर्थवन्दना 1. स्मारक चतुष्टय
SR No.090050
Book TitleAntardvando ke par
Original Sutra AuthorN/A
AuthorLakshmichandra Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year1993
Total Pages188
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Sermon
File Size37 MB
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