________________ विशिष्ट शब्दसूची 693 वाचंयमस्व-मौनव्रत 181 | विमान -प्रमाणरहित-अत्यन्त | विसंस्थुलासनस्थ-नाना प्रकारवाजिवदन-किन्नर 19 / 167 विस्तृत, विगतं मानं यस्य की बटपटे बासनोंसे स्थितः बासरशन-दिगम्बर 2064 21170 सः 101208 विमान-प्रमाण करता हुआ वातवकला-दिगम्बर 2018 वृत्रहन्-इन्द्र 11111 वृषमकवि-श्रेष्ठ कवि 12.8 वादिन्-शास्त्रार्थ करनेवाले 14.113 हित-हाथीको गर्जना 31167 1144 वियुत-दस लाख 10 / 197 बेणुध्मा-बांसुरी बजानेवाले वार्भ- वृक्षसम्बन्धी वृक्षस्येदं वियुतासु-मृत 9 / 29 12 / 200 वाक्षम् 3349 वियोग-नियमसे करने योग्य कार्य बेथस्-भगवान् वृषभदेव बालधि-पूंछ 1229 15 / 67 16109 बाधि-पूंछ 5 / 102 विरूपक-निकृष्ट-नीच 6 / 137 वैदग्धी-शोमा 22 // 134 बाल्कम्बलान्छन-पतिपनेका चिह्न | का चिह्न | विवक्षा-कहनेकी इच्छा, वक्त- वैदग्धी-सौन्दर्य-शोभा 24 / 18 7.113 मिच्छा विवेखा 24484 वैवग्ध्य-चतुराई 456 वास्तुविचा - मकान बनानेको | विवक्ष-तमिविया ने वैचात्य-धृष्टता-लज्जा 6 / 172 विधा 166122 का इच्छुक 1127 वैशालथ-पैर फैलाकर खड़े विकच-विकसित 2340 विवक्षु-वोदुमिच्छुर्विवक्षुः, धारण हुए 4 / 42 विकृत्य-विक्रिया करके 14.122 करनेका इच्छुक 1127 म्यतिकर-कार्य 6207 विचक्षण-विद्वान् 1962 विविक्ता-पवित्रा 24184 म्बलीक-असत्य 18122 पिचतुरक्रीडा-विशिष्ट चातुर्य ग्यातुक्षी-फाग 133140 विविरसु-जाननेके इच्छुक पूर्ण क्रीडा 18 / 184 ब्बाधि-शारीरिक व्यथा 652 23 / 144 विजयच्छन्द-एक हारविशेष ग्वाहाति-वाणी-दिव्यध्वनि . विशट-विशाल 171188 16 / 15 24 / 186 . विजयच्छन्द-जिसमें पांच सौ विशिल-बाप 9 / 195 म्युल्सएकाव-जिसने शरीरसे विभाणन-पान 25 / 3 लड़ियां होती है ऐसा हार। ममताभाव छोड़ दिया है इसे नारायण तथा बलभद्र विश्वजनीन-सर्वहितकारी१११७३ ऐसा मुनि 2166 पहनते हैं 1657 | विश्वदिक्कम-सब दिशाओं में वितनु-शरीररहित 4118 3 / 196 . सानो निषियों में एक निधि वितस्ति-बारह अंगुलके एक. विश्वमत-भगवान् वृषमदेव 22 / 146 . . वितस्ति होती 1803 23/74 बातचीचर-शतषी मन्त्रीका जीव विवेह-शरीररहित मुनि 4153 - विश्वारोग-विश्वरी-पृथिवीका __(भूतपूर्व घरट् ) 10 / 114 विवीधः - चन्द्रमाके समान ईश 25 / 104 सतमल-इन्द्र 8 / 255 शुक्ल 19161 विश्वास्या-विश्वतोमुखी, जिसके शतावर-इन्द्र 133117 : - विम-मूंगा रश१३३ चारों तरफ गोपुरद्वार थे बाबु-अवगर (दण्ड विद्यापरका विधियः (विधी) पविहीन (पक्षमें जो प्रत्येक विषय जीव ) 5 / 124 23 / 117 का प्रतिपादन करनेवाली मार-वर्ष"हायनोऽस्त्री शरतसमा" पिक-शिष्य 11177 थी) 24 / 186 - 2 // 142 चिाहना 11 / 205 | विचार-आहार 2012 शरीराबविगुण-पुः कान्तिान विप्रकम्मल-क-ठगनेवाले विवाण-मोजन 10 / 202 दीप्तिश्च लावण्यं प्रियवाश्यता। विधि-वेगार कराना 16168 कला कुशलता वेति सरोराक किमानिस / विधिपुरुष-मजदूर 8 / 215 / यिनो गुणाः 15 / 215 .