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________________ श्राचार्य सोमकोति एवं ब्रह्म यशोधर खाली मरी तद उपनी ए कलिंगह देस मकार तु । हीडि भार तु ॥ २६६ ॥ भिसु भारा हुए वहि बकरी मरकर भंसा होना ૫૬ वरणुजारा गरबस लगा ए वस्त्र गुणति शीवार तु । लह उजेपी आश्रीसाए ढाली गुराज यामि तु ।। २६७ ।। ताप कर चाल्यु ले गए जिन जीयज नाम कु भी ंत तिरिए यात्रीज ए राजासन तोषार तु ।। २६६ ।। कूलि सिगि सुं दृष्य ए जाणि तरिए बाचार तु 1 पालिइ राइ वीनव्यु ए जाप्यु पश्व विचार तु ।। २६६ ।। कोणि राइ पाटव्याए भिसां लेवल तलार तु । तिरिश आणी हुन् बांधीज ए राजा भोजन ठाम तु ॥ २७० ॥ हींग लूस पाणी भरीय घरीम कडाही ताम तु tfsss लोटि घणुए भूमि प्रति पुलकार तु ॥ २७१ ॥ तब रांड बोलावीउ ए श्रागलि रहा सुयार तु । पाकु पाकु छेद करे मानिला इमवार तु ॥ २७२ ॥ तिथि पापी वली तिम कोउं ए जांकुडि झांडी क्रीम तु । ते छालु तिहां सेकीउ ए करतु प्रतिघणु रीव तु ।। २७३ ।। श्रतिष्टिते वे सूर्या ए सुखि राजन श्राचार तु । एक जीव व पामीरं दुःख घणा संसार तु ॥ २७४ ॥ वस्तु ब्रह्म बोल्ड ब्रह्म बौलइ सुखि न जेरणी दूकडु जेह पच्छि पावक लोक करि पूरीड पाप कर्म वली नरय वासु । कूकड़ी तिहां जेम्मीयां पाप विशेशि बेह | जगतां मात बिलालेईतु पापतणां फल एह ॥ २७५ ॥ भूपाल | तिवासु ।
SR No.090004
Book TitleAcharya Somkirti Evam Brham Yashodhar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherMahavir Granth Academy Jaipur
Publication Year
Total Pages232
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, History, Biography, & Literature
File Size3 MB
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