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________________ ७४ अनुयोगद्वारसूत्रे इत्यादिषु तरङ्गवत्याः करणं मलयवत्याः करणम् इत्यादि रूपेण व्याख्या काय । तथा निर्देशस्तु ग्रन्थरचनारूपार्थमात्रोपलक्षको बोध्य इति । तथा - ऐश्वर्यद्योतकैः शब्देस्तद्धितप्रत्यये सति यद्रूपं निष्पद्यते तदैश्वर्यनाम । यथा - राजैव राजकः । ईश्वर एव ईश्वरकः । तलबर एव तलवरकः । एषु सार्थिकः कः । माडम्बिकः कौटुम्बिकः इभ्यः एते तु तद्धितान्ता एव । श्रेष्ठिकः सार्थवाहकः सेनापतिकः, एतेष्वपि स्वार्थिकः कः । तथा-अपत्यार्थे तद्धितप्रत्यये सति यन्नाम निष्यते तदपत्यनाम | अर्हन्माता चक्रवर्तिमाता बलदेवमातेत्यादिभिः शब्दैरर्हदादीनां आत्मानुषष्टिकार आदि को भी जानना चाहिये । इस प्रकार यह संयूध नाम है । (से किं तं ईसरियनामे ) हे भदन्त ! ऐश्वर्य नाम क्या है ? (ईसरियनामे) उत्तर- ऐश्वर्य नाम इस प्रकार से है-अर्थात् ऐश्वर्यद्योतक शब्दों से तद्धित प्रत्यय करने पर जो रूप निष्पन्न होता है वह ऐश्वर्य नाम है - जैसे (राए ईसरए, तलवरए, मार्डबिए, कोडबिए, इन्भे, सेट्ठिए, सत्थवाहए, सेणावइए) राजक, ईश्वरक, तलवरक, माडंबिक, कौटुम्बिक इभ्य, श्रेष्ठिक, सार्थवाहक, सेनापतिक। इनमें माडम्बिक, कौटुम्बिक, इभ्य ये ऐश्वर्य नाम तो तद्धित प्रत्ययान्त हैं। तथा राजा, ईश्वर, तलवर श्रेष्ठी, सार्थवाह, सेनापति ये ऐश्वर्य नाम स्वार्थ में कप् प्रत्यय होने से निष्पन्न हुए हैं ( से तं ईसरियनामे ) इस प्रकार यह ऐश्वर्य नाम है । ( से किं तं अवच्चनामे ? ) हे भदन्त ! अपत्यनाम क्या है ? ( अवच्चनामे ) કરવી. ' એવું થાય છે. આ પ્રમાણે આત્માનુષષ્ઠિકાર વગેરે વિષે પણ જાણી बेवु लेहये या अमाणे या संयूथ नाम छे. (से कि त ईसरिय नामे) डे महंत ! मैश्वर्य नाम शु छे ? (ईसरिय नामे) ઉત્તર અશ્વય નામ આ પ્રમાણે છે. અર્થાત્ અશ્વય દ્યોતક શબ્દોથી તષ્ઠિત પ્રત્યય કરવામાં આવે અને જે રૂપ નિષ્પન્ન થાય છે, તે અન્વય નામ छे प्रेम है (रायए, ईसरए, तलवरए, माडबिए, कोडुंत्रिए, इब्भे, सेट्ठिए, सत्थवाहए, सेणावइए) २०४४, ४श्वर, तलवर, भाङ जिउ, अडुमिङ, यि, श्रेष्ठिङ, सार्थ वार्ड४, सेनापति, सभां भाउजिङ, प्रोटुमिड, इल्य, या मधा भैश्वर्य नाभी तो तद्धित प्रत्ययान्त छे, तेभन राम, ईश्वर, तÃवर, श्रेष्ठी, सार्थवाह, सेनापति मा अधां मैश्वर्य नाभेो स्वार्थमां ' कप्' प्रत्यय थवाथी निष्यन्न थयेला छे. ( से त ईसरियनामे) આ પ્રમાણે આ ઐશ્વય નામેા છે. (से कि त अवच्चनामे १) हे लहन्त ! अपत्यनाम भेटले शु? (अवचनामे )
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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