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________________ अनुयोगचन्द्रिका टीका सूत्र २३२ परिमाणसंख्यानिरूपणम्. .६३९ सुप्तिङन्तादिरूपम् तद्रूपा-संख्या, पदानां संख्येयत्वात्तद्रूपा संख्याऽपि संख्येया। पादसंख्या-पादा:- गाथादिचतुर्थाशरूपाः, तद्रूपा संख्या, पादानां संख्येयवातत्संख्यापि संख्येया। माथासंख्या-गाथा प्राकृतच्छन्दोविशेषरूपा, तद्रपा संख्या, गाथानां संख्येयत्वात्ता संख्या संख्येया। श्लोकसंख्या-श्लोकाअनुष्टुबादि छन्दोरूपस्तद्रूषो संख्या श्लोकानां संख्येयत्वात्तद्रूपा संख्याऽपि संख्येव । एवं वेष्टसंख्या नियुक्तिसंख्या, अनुयोगद्वारसंख्या, उद्देशकसंख्या, अध्ययनसंख्या, श्रुतस्कन्धसंख्या, अगसंख्या च संख्येया, वेष्टकादीनां संख्येयहै। इस संघातरूप जो संख्या है वह संघातसंख्या है। छयादिअक्षरी का संयोग संग्च्यात है इसलिये यह भी संख्यात है। सुबन्त निन्नरूप पद होता है। इस पदरूप संख्या . का नाम पदसंख्या है। पदों के संख्यान होने से सदूप संख्या भी संख्यात है। गाथा आदि का जो चतुर्थ अंश है, उसका नाम 'पाद' है। इस पादरूप संख्या को नीम पांद संख्या है। पाद संख्येय होते हैं इसलिये पादप संख्या भी संख्यात है। प्राकृतभाषा में लिखे गये छंदविशेष का नाम 'गाया है। इंस गाथारूप संख्या का नाम 'गाथा' संख्या है। ये गाथाएँ संख्यात होती हैं, इसलिये गाथारूप सख्या भी संख्यात है। अनुष्टुप् आदि छन्दोंरूप श्लोक होता है। ये श्लोक संख्यात हैं। इसलिये इसरूप संख्या भी संख्यातही है। इसी प्रकार से वेष्टसंख्या, निर्याक्तिसंख्या, अनुयोगद्वारसंख्या, उद्देशकसंख्या अध्ययनसंख्या, श्रुतस्कंधसंख्या, अङ्गसंख्यां ये सष भी संख्यात ही हैं। क्योंकि ये वेष्टकादि संख्यात સુમન્ત અને તિગતરૂપ પદ હોય છે. આ પદરૂપ સંસ્થાનું નામ પદસંખ્યા છે. પદ સંપ્રખ્યાત હોવાથી તદુરૂપ સંખ્યા પણ સંખ્યાત છે. ગાથા વગેરેને જે ચતુર્થ અંશ છે. તેનું નામ “પાદ' છે આ પાદરૂપ સંખ્યાનું નામ પાદસંખ્યા છે. પાદ સપૅય હોય છે, એટલા માટે પાદરૂપ સંખ્યા પણ સંખ્યાત છે. પ્રાકતભાષામાં લખાએલા છંદ વિશેષનું નામ જાથા છે. આ ગાથારૂપ सध्यान नाम 'गाथा' सध्या छ. मा गाया। सभ्यात काय ,, मेथी ગાથારૂપે સંખ્યા પણ સંખ્યાત છે. અનુષ્કુ વગેરે છ રૂપ લેક હાથ છે. આ શ્લોક સંખ્યાત છે. એથી આ રૂપ સંખ્યાત જ છે. આ પ્રમાણે વેન્ટસ ખ્યા નિકિત સંખ્યા, અનુયાગદ્વાર સંખ્યા ઉદ્દેશક સંખ્યાં, અધ્ય यन सया, श्रुत धन्यI, सभ्य मा सपथ सभ्यात કેમકે આ વેષ્ટકાદિ સં યાત હોય છે. લેખકનામ છવિશેષનું છે, નિક્ષેપ
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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