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________________ ... अनुयोगद्वारसूत्र टीका-'से कित" इत्यादि अथ किं तत् प्रदेशहष्टान्तेन नयप्रमाणम् ? इति शिष्यप्रश्नः। उत्तरयति-प्रदेशदृष्टान्तेन-प्रष्टो देशः प्रदेशा-निविभागो भागः, स एव दृष्टान्तस्तेन नय भमाणमेवं विज्ञेयम्-नैगमनयो भणति-पण्णां प्रदेशः, तद्यथा-धर्मप्रदेशः, अधर्मप्रदेशः आकाशपदेशः, जीवप्रदेशः, स्कन्धपदेशः, देशपदेश इति । अत्र धर्म शब्देन धर्मास्तिकायो विपश्यते तस्य प्रदेशो धर्मप्रदेशः । एवमधर्माकाशजीवशरवि अस्तिकायविशिष्टा अथर्माकाशनीचा विवक्षिताः । तथा स्कन्धः पुद्गलद्रव्यसमूहसार प्रदेशः-स्कन्धप्रदेशः । देश:परिनिर्दिष्टानां धर्मास्तिकाया. ___ अब सूत्रकार प्रदेश दृष्टान्त से नय के स्वरूप का प्रतिपादन करते हैं-'सेः किं तं पएसदिढतेणं ? ' इत्यादि । - शन्दार्थ--(से कितपएसदियुतेणं) हे भदन्त ! प्रदेशदृष्टान्त से नय के स्वरूप का प्रतिपादन किस प्रकार से है ? . उत्तर--(पएसदितेणं) प्रदेशरूप दृष्टान्त से नपके स्वरूप का प्रतिपादन इस प्रकार होता है-(णेगमो भणइ) नैगमनय कहता है (छण्ह पएसा) कि छह द्रव्यों का प्रदेश है-(तं जहा) जैसे-(धम्मपएसो, अधम्मपएमो आगासपएसो, जीवपएसो, खंधपएसो, देसपएसो,) धर्मास्तिकाय का प्रदेश, अधर्मास्तिकाय का प्रदेश, आकाशास्तिकाय का प्रदेश, जीवास्तिकाय का प्रदेश, स्कंध प्रदेश और देश प्रदेश । प्रकृष्ट देश का नाम प्रदेश है । अर्थात् जिसका दूसरा विभाग न हो सके ऐसा जो भाग है वह प्रदेश है । पुद्गल द्रव्य के समूह का नाम હવે સૂત્રકાર પ્રદેશ દષ્ટાન્તથી નય-સ્વરૂપનું પ્રતિપાદન કરે છે – 'से कि तं पएसदिटुंतेण'१' शनार्थ:-(से कि त पएसदिढतेणे) ३ त ! प्रदेश तथा નયના સ્વરૂપનું પ્રતિપાદન કેવી રીતે થ ય છે ? : उत्तर -(पएसदिटुंतेणं) प्रदेश ३५ हटान्तया नयना १३५नु प्रति पान मा शत थाय छे. (णेगमो भणइ) नशमनय ४. छ. (छण्ह पएसा) ६ व्याना प्रटेश (तंजहा) मई (धम्मपएसो, अधम्मपएसो, भागासपरसो, जीवएसो, खंधपएसो, देसपएसो) स्तिय प्रश, मतिय प्रदेश, આકાશાસ્તિકાય પ્રદેશ, જીવારિતકાય પ્રદેશ, રકંધ પ્રદેશ અને દેશ પ્રદેશ. પ્રકૃણ દેશનું નામ પ્રદેશ છે. એટલે કે જેનું બીજી કોઈ પણ રીતે વિભાજન થય નહિ એ જે ભાગ છે, તે પ્રદેશ છે. પુદગલ દ્રવ્યના સમૂહનું નામ
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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