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________________ ૪૦૮ अनुयोगद्वारसूत्रे ___ इत्थमोधतः पञ्चविधान्यपि शरीराण्युक्त्वा सम्मति नारकादिचतुर्विंशति दण्ड के विशेषतस्तानि मरूपयितुमाह मूलम्-नेरइयाणं भंते ! केवइया ओरालियसरीरा षण्णत्ता ? गोयमा! ओरालियसरीश दुविहा पण्णता, तं जहा-बद्धेल्लया य मुक्केल्लया य । तत्थ णं जे से बद्धेल्लया ते ण नस्थि । तत्थ णं जे ते मुक्केल्लया ते जहा ओहिया ओरालि यसरीरा तहा भागियत्वा । नेरइयाणं भंते ! केवइया वे उत्रियालरीरा पण्णता? गोयमा! वेउवियसरीरा दुविहा पण्णता, तं जहा-बद्धेल्लया य मुक्केल्लया य। तत्थ णे जे ते बद्धेल्लगा ते जे असांखिज्जा असंखिज्जाहिं उस्सप्पिणीओसप्पिणीहिं अवहीरंति कालओ, खेत्तओ असंखेज्जाओ सेंढीनो पथरस्ल असंखिज्जहभागे, तासि ण सेढीणं विक्खंभसूई अंगुलपढमवग्गमूलं बिइ अवग्गमूलपडुप्पणं। अहव गं अंगुलबिइअवग्गमूलघणपमाणगौतम ! कामण शरीर दो प्रकार के कहे गये है ? (तं जहा वे ये हैं(बद्धेल्लया य मुक्केल्ले या य) एक बद्ध और दूसरे मुक्त । (जहा तेयग सरीरातहा कम्मगसरीरा वि भाणियन्या) दोनों प्रकार के शरीरों के विषय का कथन तेजस शरीर के कथन के जैसा जानना चहिये । क्योंकि तैजस और कार्मण शारीरों के स्वामी सम्मान हैं। तथा ये दोनों शरीर साथ २ रहते हैं। सू० २१२ ॥ (गोयमा! कम्मयखरीरा दुविहा पण्णत्ता १) ॐ गौतम र शरीर में रन अामा माया छे. (तंअहा) ते प्रभाबी छ, (बद्धेल्लया य मुक्के ल्लया य) मे न भ न भुत (जहा सेयगरीरा सहा कम्मगसरीरा विभाणियबा) -२ रन शरीराना विषयनु थन ते शरीरना કથનની જેમ જ જાણવું જોઈએ કેમકે તેજસ અને કાર્યક શરીરના સ્વામી સમાન છે. તેમજ આ બને શરીરે સાથે સાથે રહે છે. સૂ૦૨૧૨
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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