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________________ ३२४ अनुयोगहारो यतियम् योनिकानां पृच्छा, गौतम ! जघन्येनापि अन्तर्मुहम, उत्कर्षेणापि अन्तमुहूर्तम् । पर्याप्तकवेवरपश्चेन्द्रियतिर्यग्रयोनिकानां भदन्त ! कियन्तं काल स्थितिः प्रज्ञप्ता ? गौतम ! जघन्येन अन्तर्मुहूर्तम, उत्कर्षे पल्पमस्य असंख्येयभागम् अन्तर्मुहानम् । अत्र एतेषां खलु संग्रहण्यौ गाथे भरतः, तद्यथा संमूछिमपूर्वकोटिश्चतुरशीतिर्भवेत् सहस्राणि । त्रिपश्चाशद् द्विचत्वारिंशद् द्विसप्ततिरेव पक्षिणाम् ॥१॥ गर्भे पूर्वकोटिस्त्रीणिच पल्योपमानि परमायुः। उरो भुजगपूर्वकोटिः पल्योपमासंख्येयभागश्च ॥२॥ गौतम ! जघन्य से अंतर्मुहूर्त की है और उत्कृष्ट से एक पल्योपम के असंख्यातवें भाग है । (अपज्जत्तगगभवक्कंतियखहयरपंचिंरिय. तिरिक्ख जोणियाणं पुच्छा गोथमा ! जहण्णेण वि अंतोमुहुत्त उक्को. सेण वि अंतोमुहत) अपर्यातक गर्भज खेचर पंचेन्द्रियतियश्चों की स्थिति हे गौतम जघन्य से भी अन्तर्मुहर्त की है और उत्कृष्ट से भी अन्तर्मुहूर्त की है (पजत्तगखहयरपंचे दियतिरिक्खजोणियाणं भंते ! केवइयं कालं ठिई पण्णत्ता ) हे भदन्त ! पर्याप्तक खेचर पंचेन्द्रिय तिर्यश्चोंकी स्थिति कितने काल की कही गई है ? (नोयमा ! जहन्नेणं अंतो. मुहत्त, उक्कोसेणं पलिभोवमस्त असंखिज्जहभागं अंतोमुहूत्तूणं) हे गौतम! जघन्य से अन्तर्मुहूर्तकी और उत्कृष्ट से एक अन्तर्मुहूर्त कम एक पल्योपम के असंख्यातवें भाग प्रमाण कही गई है। यहां पर ये 'संच्छिम. पुचकोडि' इत्यादि दो संग्रह गाथाएँ है उनका भाव आ चुका है હે ગૌતમ! જઘન્યની અપેક્ષાએ અંતમુહુર્ત જેટલી છે અને ઉત્કૃષ્ટની अपेक्षा मे पक्ष्या५मना असल्यामi In प्रभानी . (अपज्जत्तगगम्भवतियवहयरपंचिं दियतिरिक्खजोणियाणं पुच्छा गोयमा! जहण्णेण वि अंतोमुहुरा उकोसेग वि अंतोमुहत्तं अर्यात गम मेयर પંચેન્દ્રિય તિર્યંચોની સ્થિતિ હે ગૌતમ! જઘન્યની અપેક્ષાએ પણ અન્તર્મુહૂત્તની છે અને ઉત્કૃષ્ટની અપેક્ષાએ પણ અંતમુહૂત્ત જેટલી છે. (पज्जत्तगखहयरपंचेदियतिरिक्खजोणियाणं भंते। केवइयं कालं ठिई पण्णता ?) હે ભદંત પર્યાપક ખેચર પંચેન્દ્રિય તિય ચાની સ્થિતિ કેટલી કાલની કહેવામાં माकी छ १ (गोयमा ! जहन्नेणं अंतोमुहुतं, उन्कोसेणं पलिओवमस्स असंखिज्जइभागं अतोमुहुत्तण) गीतम! धन्यनी अपेक्षा अतभुत नी मनेष्टनी અપેક્ષાએ એક સુહત્ત ન્યૂન એક પોપમના અસંખ્યાતમા ભાગ પ્રમાણુ ४ामा भावी छ. गडियां 'समुच्छिम पुग्धकोडी' त्य स आया।
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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