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________________ २० अनुयोगद्वारसूत्र स्स, कोइ पोसेज्ज एलय' । इत्यादि गाथाऽस्ति । अत्रस्थम्-'एलयं' पदमादाये. दमध्ययनम् 'एलइज्जं' इत्युच्यते । 'बीरियं' इति । 'दुहा वेयं सुयक्खायं वीरियंति इत्यादि गाथा सूत्रकृताङ्गस्याष्टमाध्ययनमारम्भेऽस्ति, अत्रत्यं-'पीरियं' इति पदमादाय इदमध्ययनं 'वीरियज्झयणं' इत्युच्यते । 'धम्मो' इति। सूत्रकृताङ्गस्य नवमाध्ययनारम्भे-'कयरे धम्मे अक्खाए माहणेण मईमया ॥” इत्यादि गाथाऽस्ति, अत्रत्यं 'धम्मो' इति पदमादाय अस्य अध्ययनस्य 'धम्मज्झयणं' इति संज्ञा कृता 'मग्गो' इति सूत्रकृताङ्गस्य एकादशाध्ययनस्तावे-'कयरे मग्गे अक्खाए माहणेणं मईमया'-इत्यादि गाथा वर्तते, अत्रत्यं 'मग्ग शब्द तुपादाय-अस्याध्ययनस्य 'मग्गज्झयणं' इति नाम कृतम् । तथाऽस्थैव द्वादशाध्ययनमस्तावे 'चत्तारि प्रारम्भ में "जहा एसं समुहिस्स कोह पोसेज्ज एलयं" इत्यादि गाथा है। इस गाथास्थ " एलयं " पद को लेकर इस अध्ययन का नाम "एलइज्ज" ऐसा हुआ है। "दुहावेयं सुयक्खायं वीरियंति पवु. उचह" इत्यादि गाथा सूत्रकृताङ्ग के अष्टम अध्यय के प्रारंभ में है। सो उसके " वीरिय" इस पद को लेकर यह अध्ययन वीरियज्झ. यणं" इस नाम से कहा गया है। सूत्रकृताङ्ग के नौवें अध्ययन के प्रारम्भ में " कयरे धम्मे अक्खाए माहणे ग मई मया " इत्यादि गाथा है। उसके "धम्म" इस पद को लेकर इस अध्ययन का "धम्मज्झयणं" ऐसा नाम हुआ है। सूत्रकृताङ्ग के ११ वें अध्ययन के प्रस्ताव में "कयरे मग्गे अक्खाए माहणेणं मईमया" इत्यादि गाथा है। सो वहां के " मग्ग" इस शब्द को लेकर इस अध्ययन का नाम "मग्गज्झ अध्ययनना प्रारममा "जहा एसं समुहिस्स कोइ पोसेज्ज एलय" वगैरे शाया छ, मा आयामां मावेल 'एलय' पहना माघारे मा अध्ययननु नाम "एलइन्ज" से छे. “दुहावेयं सुयक्खायं वीरयति पवुच्चइ" वगेरे आया सूतinal मटम अध्ययनना प्रारममा छ. ते तना "वीरिय" मा पहना आधारे मा अध्ययन "वीरियज्झयण" मा नामयी उपाय छे. सूतin नवमा मध्ययनना पार सम “कयरे धम्मे अक्खाए माहणेण मई मया " वगेरे गाय छे. तेना " म" मा पहने छन मा अध्ययनतुं "धम्मज्झयणं " मेनु नाम रामपामा मा०यु छ. सूत्रतांना ११ मा अध्ययनना प्रस्तावमा "कयरे भग्गे अक्खाए माहणेणं मईमया" वगरे पथ छे. तमांना "मग." हमे बने मा अध्ययन नाम
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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