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________________ अनुयोगद्वारसूत्रे मिति सूचयितुमाह-नदेतदुद्धारपल्योपममिति ।। मूले-'तेगं वालग्ना' इति प्रथमा. न्वत्वेन द्वितीयान्तत्वेन च तन्त्रेण निर्दिष्टम् सूत्रे पुंस्त्वमाषत्वात् ।।५० २०४॥ । चाहिये कि ये जो बालाग्रखंड हैं वे असंख्योत हैं। प्रतिसमय एक एक बालाय खंड के निकालने पर संख्यात वर्ष कोटिकोटि समाप्त हो जाती है । इसलिये इसका मान संख्यात वर्ष को टिका है । (एएसिं पल्लाणं कोडाकोडीहवेज्जइसगुणिया सुहमत उद्धारसागरोजमस्स एगस्स मवे परिमाणं) इन पल्योंकी १० गुणित जो कोटिकोटि है, वह एक सूक्ष्म उद्धारसागरोपम का परिमाण होती है। (एएहि सुहमउद्धार. पलिओवमसागरोवमेहिं कि पओयणं) हे भदन्त ! इन सूक्ष्म उद्धार पल्योपम एवं सूक्ष्म उद्धार सागरोपम से क्या प्रयोजन सिद्ध होता है ? उत्तर-(एएहिं सुहम उद्धार पलिभोवमसागरोवमेहिं दीवसमुदाणं. उद्धारो घेप्पइ) इन मूक्ष्म उद्धारपल्पोपम एवं सूक्षत्र उद्धार सागरोपम से द्वीप समुद्रों का उद्धार प्रमाण ग्रहण किया जाता है। (केवयाणं भंते! दीवतमुद्दा उद्धारेणं पर गत्ता) यहां शिष्य पूछता है-हे भदन्त ! उद्धारपल्योपम एवं उद्धारसागरोपम कितने द्वीपसमुद्रों को बताते हैं ? उत्तर-(गोयमा ! जावयाणं अड़ा इजाणं उद्धारसागरोवमाणं उद्धारसमया एवल्याणं दीवसमुद्दा उद्धारेणं-से तं सुहुमे उद्धारपलिજાણવું આવશ્યક છે કે આ જે બાલાગ્ર ખંડ છે, તે અસંખ્યાત છે પ્રતિ. સમય એક–એક બાલારા ખંડને બહાર કાઢવાથી સંખ્યાત વર્ષ કેટિ કટ સમાપ્ત થઈ જાય છે. એથી આનું નામ સંખ્ય ત વર્ષ કોટિનું છે. (एएपिल्लाणकोडाकोडी हवेज दस गुणी या तं सुहमस्स उद्धारसागरोवमस्स एगरस भवे परिमाण) मा ५६ये।५भनी १० गुणित -छि त । सूक्षम द्वार सगरीपभानु परिमाय उय छे. (एएहि मुहुमपलिओवमसागरोवमे हि कि पओयणं) उ त! मा सूक्ष्म द्वारपक्ष्या५५ सने सूक्ष्म द्धार સાગરેપમથી કર્યું પ્રયજન સિદ્ધ થાય છે? उत्तर-(एएहिं सुहुंम उद्धारपलि पोषमसागरोव मेहि दोबस मुद्दाणं उद्धारो घेप्प३) मा सूक्ष्म २५८य:५म भने सूक्ष्म उद्धार सागरे।५मथा द्वीप समुद्रीनी गात्री भाट उद्धार प्रभाष्य & ४२वामा भाव छ (केवइया णं भंते ! दीवस मुद्दा उद्धारेणं पण्णत्ता) मी शिष्य रे 8-3 ભદત ! ઉદ્ધાર પલ્યોપમ અને ઉદ્ધાર સાગરેપમ કેટલા દ્વીપ સમૂહોને બતાવે છે? . .. अत्तर-(गोयमा ! जावइयाणं अडाइज्माण उद्धारसागरोषमाण उद्धारसमया .एसइयाण दीवसमुद्दा. उद्धारेण-से तं सुहुमे उद्धारपलिओवमे) गीतमा
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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