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________________ अनुयोगन्द्रिका टीका सूत्र १९६ नैरयिकाणां शरीरावगाहनानिरूपणम् १६३ शरीरावगाहना प्रमागमुक्त्वाऽसुरादीनां शरीरावगाहनाममाणमाह-'असुरकुमाराणं भंते ! इत्यारभ्य 'थणियकुमाराणं भाणियवं' इत्यन्तेन सन्दर्भण। व्याख्या निगदसिद्धा। सू०१९६॥ समस्त पृथिवियों के विषय में प्रश्न का उद्भावन कर लेना चाहिए-(पंक: प्पहाए पुढवीए भवधारणिज्जा जहण्मेणं अंगुलस्स असंखेज्जहभागं; उक्कोसेणं बासहि धणूई दो रयणीओ य) पंकप्रभा में भवधारणीय अवगाहना जघन्य से अंगुल के असंख्यातवें भागप्रमाण और उत्कृष्ट से बासठ धनुष प्रमाण दो रहिन हैं। (उत्तरवेउन्चिया जहण्जेणं अंगुलस्स. संखेज्जहभागं उक्कोसेणं पणवीसं धणुसयाई) उत्तरवैक्रिय अवगाहना जघन्य से अंगुल के संख्यातवें भाग प्रमाण और उत्कृष्ट से १२५ धनुष प्रमाण है । (धूमप्पहाए भवधारणिज्जा जहण्णेणं अंगुलस्स असंखे. ज्जइभाग, उक्कोसे पणवीस धणुसयाई) धूमप्रभा में भवधारणीय अवगाहना जघन्य से अंगुल के असंख्यातवें भाग प्रमाण और उत्कृष्ट से १२५ धनुष प्रमाण है । (उत्तरवेउविया अंगुलस्स संखेज्जा भाग उकोसेणं अड्डाहज्जाई धणुसयाई) उत्तर वैक्रिय अवगाहना जघन्य से अंगुल के संख्यातवें भाग प्रमाण और उत्कृष्ट से ढाई सौ २५० धनुष प्रमाण है । (तमाए भवधारणिज्जा जहण्णेणं अंगुलस्स असंखेज्जइ भागं, उक्कोसेणं अड्डाहज्जाई धणुसयाई) तमाप्रभा नाम की छठी આ પ્રમાણે સમસ્ત પૃથિવીએાના સંબંધમાં પ્રશ્નોની ઉદુભાવના કરી લેવી. AS (कप्पहाए पुढवीए भवधारिणिज्जा जहण्णेणं अंगुलस्स असंखेज्जइ भाग, उक्केसेणं बोसद्विधणूई दो रयणीओ य) ५४मामा अधारणीय माना જઘન્યથી અંગુલના અસંખ્યાતમા ભાગ પ્રમાણ ઉત્કૃષ્ટથી ૬૨ ધનુષ પ્રમાણુ मन मे २लि छे. (उत्तरवेउन्धिया जहण्णेणं अंगुलस्त्र संखेज्जइभागं उक्कोसे पणवीस धणुसयाई) उत्तरवैठिय अपना धन्यथी म शुलना सभ्यातमा In प्रभार भने Gथी १२५ धनुष प्रमाण छे. (धूमप्पहाए भवधार. जिजजा जहण्णेणं अंगुलस्स असंखेजइभाग, उक कोसेणं पणवीसं धणुसयाई) धूम પ્રભામાં ભવધારણેય અવગાહના જઘન્યથી અંગુલના અસંખ્યાતમાં ભાગ प्रभा भने Gथी १२५ धनुष प्रमाण छ. (उत्तरवेषिया अंगुलस्स संखेज्जइभाग उनकोसेणं अडाइजाई धणुसयाई) उत्तरवैठिय म॥ જઘન્યથી અંગુલના સંખ્યામાં ભાગ પ્રમાણ અને ઉત્કૃષ્ટથી ૨૫૦ ધનુષ प्रमाण छ. (तमाए भवधारणिज्जा जहण्णेणं अंगुलस्स असंखेज्जइभागं उस्को.
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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