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________________ अनुयोगद्धारसूत्रे तुलयन पुरुषः उन्मानयुक्तो भवति । अयं भावः-तुलायामारोपितो यः पुरुषः सारपुद्गलरचितत्वात् अद्धभारं तुलयति स उन्मानयुक्त इत्युच्यते, इति । तत्रोत्तमपुरुषाः उपर्युक्तैः-प्रमाणमानोन्मानस्तथाऽन्यैश्च गुणैर्युक्ता एव भवन्तीति दर्शयितु माह-'माणुम्माणपमाण' इत्यादि। अयं भाव:-ये पुरुषा मानोन्मानप्रमाणयुक्ताःउपरिनिर्दिष्टानोन्मानप्रमाणः सहिताः, तथा-लक्षणव्यञ्जनगुणैः-लक्षणानिशङ्खस्वस्तिकादीनि, व्यञ्जनानि-मपीतिलकादीनि, गुणा: औदार्यादयस्तैरुपपेता युक्ताः, तथा-उत्तमकुलप्रसूताः उत्तमकुलानि-उग्रादिकुलानि तेषु प्रमूताः समुत्पन्नाच सन्ति, ते उत्तमपुरुषाः चक्रवदियो विज्ञेया इति । एषानुचवप्रमाणं ..माना जाता है। (अद्धभारं तुल्लमाणे पुरिसे उम्माणमुत्ते भवई) अर्द्ध भार प्रमाण तुला हुआ व्यक्ति-पुरुष-उन्मानयुक्त होता है-इसका तात्पर्य यह है कि तराजू पर आरोपित हुआ पुरूष सार पुगलों से निर्मित होने के कारण अर्द्धभार प्रमाण तुलता है-अर्थात उसका वजन अर्द्धभार प्रमाण बैठता है तो वह पुरुष उन्मानयुक्त माना जाता है । जो उत्तर पुरुष होते हैं वे इन उपर्युक्त मान उन्मानप्रमाण .. वाले होते हैं तथा अन्य गुणों से युक्त ही होते हैं । इसी बात को अब सूत्रकार प्रदर्शित करते हैं-(माणुम्माणपमाणजुत्ता लखगवंजण. गुणेहि उबवेया) जो पुरुष मान उन्मानप्रमाण संपन्न होते हैं, तथा शंख स्वस्तिक आदि लक्षणों से मषा, तिलक-तिल-आदि व्यंजनों से, एवं औदार्य आदि गुणों से युक्त होते हैं (उत्तमकुलप्पसुग जसमपुरिसा मुणेशव्या) उग्रादि उत्तमलों में उत्पन्न होते हैं वे चक्र वर्ती आदिरूप उत्सम “पुरुष जानना चाहिये। (होति पुण अहीय पुरिसा પ્રમાણુ તુલિત વ્યક્તિ-પુરૂષ-ઉન્માન યુકત હોય છે તાત્પર્ય આ પ્રમાણે છે કે ત્રાજવા પર આ પિત થયેલ પુરૂષ સાર પલે વડે નિર્મિત હોવા બદલ અધભાર પ્રમાણુ થાય છે. એટલે કે તેનું વજન આર્યભાર પ્રમાણ સુધી હોય તે તે પુરૂષ ઉન્માન યુકત માનવામાં આવે છે જે ઉત્તમ પુર કાય છે તે ઉપર્યુકત માન-ઉન્માન પ્રમાણુ યુક્ત હોય છે તેમજ બીજા -शुशथी युताय छ मे पात २५८ ४३ छ. (माणुम्माणपमाणजुत्ता ‘लक्खणवंजणगुणेहिं उबवेया) २ ५३९ भान Eमान प्रभा સપન હોય છે, તેમજ શંખ, સ્વસ્તિક વગેરે લક્ષણેથી, મષા, તિલક, તલ पोरे व्यनाथी मन मोहाय वगैरे शाथी पान डाय छे. (उत्तमकुलप्प सुया उत्तमपुरिसा मुणेयत्वा) GALLEGHA मा म ४३ छ, ते
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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