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________________ अनुयोगचन्द्रिका टीका सूत्र १९२ क्षेत्रप्रमाणनिरूपणम् दिरूपं बोध्यम् । तत्र- अशलम्-आत्माङ्गुलौत्सेधाङ्गुलप्रमाणाङ्गुलेति त्रिविधम् । तत्र-आत्मामालम्-आत्मन:-स्वस्य अङ्गुलम् । अत्रात्मशब्देन तत्तकालसमुत्पनो भरतसगरादिविवक्षितः, तत्तत्सम्बन्धि अङ्गुलम्-आत्मागुलमित्यर्थः। ये समानार्थक शब्द हैं । इस विभाग से निष्पन्न होना उसका नाम विभागनिष्पन्नता है। यह विभागनिष्पन्नता अङ्गुल वितस्ति (वैत) आदि रूप जानना चाहिये । क्यों कि इस प्रकार से क्षेत्र जाना जाता है। प्रदेश निष्पन्नता में क्षेत्र अपने ही प्रदेशों द्वारा जाना जाता है-तष कि विभाग निष्पन्नता में विविध अंगुल वितस्ति आदि रूप प्रकारता से जाना जाता है। यह कथन प्रमाण शब्द की करणासाधनरूप व्युत्पत्ति की अपेक्षा जानना चाहिये। (से कितं अंगुले) हे भद्रत । वह अंशुल क्या है। उत्तर-(अंगुले तित्रिहे पण्णत्ते) वह अंगुल तीन प्रकार. का होता है-(तंजहा) उसके वे प्रकार ये हैं-(आयंगुले, परसेहंगुले प्रमाांगुछे) आस्मांगुल उत्सेधांगुल और प्रमाणांगुल (से किं तं आयंगुले) हे भदन्त! वह आत्माङ्गुल क्या है ? उत्तर-(आयंगुले) वह आत्माङ्गुल इस प्रकार से है-(जेणं जया मणुस्सा भवंति, तेसिणं तया अप्पणो अंगुलेश दुवालल अंगुलाई, नवमुहाई पुरिसे, पमाणजुते भवह) आत्मांगुल में आत्मा का अर्थ આ બધા સમાનાર્થક શબ્દ છે આ વિભાગથી નિષ્પન થવું તે વિભાગ નિષ્પન્નતા છે આ વિભાગ નિષ્પન્નતા અંગુલીવિતતિ (વંત) વગેરે રૂપમાં જાણવી જઈએ, કેમકે આ રીતે જ ક્ષેત્ર જાણવામાં આવે છે. પ્રદેશ નિષ્ણાતામાં ત્ર પ્રદેશ વડે જ જાણવામાં આવે છે ત્યારે વિભાગ નિપૂજનતામાં વિવિધ અંગુલ, વિતસ્તિ વગેરે રૂપ પ્રકારતા વડે તે જાણવામાં આવે છે. આ કથન પ્રમાણ શબ્દની કરણ સાધન રૂપ વ્યુત્પત્તિની અપેક્ષાએ જાણવું જોઈએ (से कि त अंगुले) 8 मत ! भYA उत्तर-(अंगुले तिविहे पण्णत्ते) सना । (वजह मा प्रमाणे छ (आयंगुले, उस्सेहंगुले पमाणगुले) आमांशु, Gayija मन प्रभाiye (से कि त आयंगुले) 3 ! भामाशुस छ । उत्तर-(आयंगुले) a मामांYa या प्रमाणे. (जे.णं जया ममुख्या भवति, ते सिणं तया अपणो अंगुलेण दुवालल अंगुलाई, मुहं, नवमुहाई पूरिख, पमाणजुत्ते भवइ) आत्मासमा मात्मा शहना भय तपाता।
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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