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________________ अनुयोगचन्द्रिका टीका सूत्र १९१ प्रतिमानप्रमाणनिरूपणम् फर्ममासकः । द्वादशकर्ममाषका एको मण्डलकः, षोडशकर्ममाषक: एकः सुवर्णः। अमुमेवाथै सूत्रकारोऽपि किंचित् सूचयति-'पंच गुंजाओ' इत्यादिना। व्याख्या स्पष्टा । एतस्य प्रतिमानप्रमाणस्य प्रयोजनमभिधित्सुराह-एतेन प्रतिमानप्रमाणेन सुवर्णरजतमणिमौक्तिकशंखशिलापवालादीनाम्-सुवर्ण-हेम, रजतं रूप्यम्, मणयाचन्द्रकान्तादया, मौक्तिकानि-मुक्ता, शलो रत्नविशेषा, शिला-राजपट्टको है। १२ कर्ममासकों का १ मंडल होता है । १६ कर्ममाषकों का एक सुवर्ण होता है। इसी बात को सूत्रकार ने (पंचगुंजाओ कम्म मासओ, चत्तारि कागणीओ कम्ममासओ, तिण्णि, निष्फावा कम्ममासओ एवं घउको कम्म मासओ, बारस कम्ममासया मंडलओ, एवं अडयोलीस कागणीओ मंडलओ, सोलसकम्ममासया सुवण्णो, एवं चउसहि कागणीओ सुवण्णो) इस सूत्रपाठ द्वारा स्पष्ट किया है। इसमें वे कह रहे हैं कि पांच गुंजा से १ कर्ममाषक निष्पन्न होता है । अथवा चार काकिणी से १ कर्ममाषक निष्पन्न होता है। या तीन निष्पावों से १ कर्ममाषक बनता है। इसी प्रकार चार काकिणियों से चौथा कर्म माषक निष्पन होता है ।१२ कर्ममाषकों का १ मंडल होता है। इसी प्रकार से ४८ काकिणियों से १ मंडलक होता है । १६ कर्ममाषकों का १ सुवर्ण होता है। 'अथवा-चौंसठ काकिणियों का १ सुवर्ण होता है । (एएणं पडिमाणप. माणेणं कि पओयणं १) हे भदन्त ! इस प्रतिमान प्रमाण से किस प्रयोजन की सिद्धि होती हैं ? બને છે. ૧૬ કર્મમાષકનું એક સુવર્ણ હોય છે. એજ વાતને સરકારે (पंच गुंजाओ कम्ममासओ, बचारि कागणीओ कम्ममासओ, विणि, निफावा कम्ममासमो एवं पक्को कम्ममासओ, पारस कम्ममासया मंडलओ, पूर्व . चालीस कागणीओ मंडलओ, स्रोळसकम्ममासया सुवण्णो, एवं चउसाद कागः जीओ सुवण्णो) मा सूत्रा8 43 २५४ थुछ यांय शु भ भाप નિષ્પન્ન થાય છે અથવા ચાર કાકણથી ૧ કર્મમાષક નિષ્પન્ન થાય છે અથવા ત્રણ નિષ્પાવોથી ૧ કર્મમાષક નિષ્પન્ન થાય છે આ પ્રમાણે ચાર કાકણીઓથી ચતુર્થ કર્મમાષક નિષ્પન્ન થાય છે ૧૨ કમમાષકનું ૧ મંડળ થાય છે આ પ્રમાણે ૪૮ કાકણીએ બરાબર ૧ મંડલક હોય છે. ૧૬ કર્મમાષક બશ. બર ૧ સુવર્ણ હોય છે અથવા ૬૪ કાંકણ બરાબર ૧ સુવર્ણ હોય છે. (एएणं पडिमाणपमाणेणं किं पोयणं ।) BRTI मा प्रतिमान प्रभावी કયા પ્રયજનની સિદ્ધિ થાય છે? ___.
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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