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________________ मधुयोगचन्द्रिका टोका सूत्र १५६ पारिणामिकभावनिरूपणम् कालः। गन्धर्व नगराणि-उत्तमोसम प्रासादोपशोभित नगराकृतितया परिणतास्त. थाविधनमःपुद्रलाः। उल्कापाता: आकाशपदेशतस्तेजः पुञ्जपतनानि । दिग्दाहाःअन्यतरस्यां दिशि नमानदेशे ज्वालामालाकरालित ज्वलनावमासनानि। तथा-गजितं विधुत् एतौ मसिदावेव। निर्घाता=विद्युत्पाताः। तथा-यूपका:-शुक्लपक्षीयदिनत्रयावस्थायिनः संध्याच्छेदावरणा बालचद्रेति प्रसिद्धाः ॥उक्तंचावश्यके संशाच्छेयावरणो य ज्यओ मुक्कदिण तिन्नि" ॥ छाया-संध्याच्छेदावरणश्च यूपकः शुक्छे दिनानि त्रीणि-इति ॥ तया-यक्षादीप्तानि नभसि दृश्यमानाः पिशाचाकृतयोऽग्नयः धूमिका=नभसि रूक्षः प्रविरलो धूम इव दृश्यमानो 'धूमिका' इत्युच्यते। महिका-जलकणयुता तथा-(अम्माय अन्भरुक्खा, संझा गंधवणगराय)अभ्र-मेघ अभ्र. वृक्ष-वृक्षाकार में परिणमित हुए मेघ, संध्या-अहोरात्रका संधिकाल कि जिसमें आकाश कृष्ण, नीलादिरूप में परिणत हो जाता है। गंधर्वनगर-उत्तमोत्तम प्रासाद से शोभित नगर की आकृति जैसे बने हुए आकाश पुद्गल (उक्कावाया) उल्कोपात आकाश प्रदेश से गिरता हुआ तेजः पुंज (दिसा दाहा) दिग्दाह-किसी एक दिशाकी ओर आकाश में जलती हुई अग्नि का आभास-(दिखलाई देना) होना (गज्जिया) गर्जित मेघ की गर्जना, (विज्जू ) विजली (णिग्धाया) निर्यात-विजली कापात (जूवया) यूपक-शुक्लपक्षसंबन्धी तीन दिनका बालचन्द्र, (जक्खादित्ता) यक्षदीप्त-अकाश में दिखलाई देती हुई पिशाचाकृति जैसी अग्नि (धमिया) धूमिका-आकाश में रूक्ष एवं विरल दिखलाई पड़ती हुई धूमकी तरह एक प्रकार की धूमस, (महिया) महिका-जलकण युक्त धूम जैसी भाप અજવૃક્ષ (વૃક્ષાકારે પરિણમિત થયેલા મેઘ) સંધ્યા (દિવસ અને રાત્રિને સંધિકાળ કે જેમાં આકાશ કૃષ્ણ, નીલાદિ રૂપે પરિમિત થઈ જાય છે, ગંધર્વનગર (ઉત્તમોત્તમ પ્રાસાદથી શોભતા નગરની આકૃતિ જેવાં બનેલાં भाग ), (उकावाया) Gestid (माशिममा स२४ते ). (दिसादाहा) is (BTS हिम मानी २ Haralad भनिना मामास वे!), (गज्जिया) मेघनी ना, (विजू) विजी, (णिग्याया), निर्यात (Areी ५४ी), (जूवया) यू५४ (शुस पक्षन। १ हिसन मासयन्द्र), (जम्खादित्ता) यक्षात (माशमा माता पियाति नेवी मनि), (धमिया) भूमिह (धूमस) (महिया) मलि (45 युत धुभा। । १७ एमस)
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
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